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पांच घंटे बिलखते रहे परिजन, शव ले जाने के लिए नहीं मिली सरकारी एंबुलेंस-सीएम  के आदेश ताक पर

पिछले महीने आर्थिक तंगी के कारण एक युवती ने अपने भाई का शव टैक्सी की छत पर बांधकर हल्द्वानी से गंगोलीहाट (पिथौरागढ़) ले जाने का मामला तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए थे और जरूरतमंद परिवारों के लिए फ्री एंबुलेंस की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए थे।

इसके बावजूद, शुक्रवार को एक महिला का शव अत्मोड़ा (पिथौरागढ़) ले जाने के लिए परिजनों को घंटों इंतजार करना पड़ा और अंत में निजी खर्च पर एंबुलेंस की व्यवस्था करनी पड़ी। सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी में भर्ती 45 वर्षीय हेमा देवी की मौत के बाद परिजनों को अस्पताल से एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल सकी।

हेमा देवी, जो कि अत्मोड़ा जिले के स्याल्दे भिकियासैंण ब्लॉक के पैठणा गांव की निवासी थीं, 23 दिसंबर को पेड़ से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। उन्हें उसी रात हल्द्वानी स्थित सुशीला तिवारी अस्पताल लाया गया और अगले दिन 24 दिसंबर को मेडिसिन आईसीयू में भर्ती किया गया। परिजनों का आरोप है कि इस दौरान उन्हें समुचित इलाज नहीं दिया गया, खासकर न्यूरो विभाग द्वारा।

महिला की शुक्रवार सुबह 8:30 बजे मौत हो गई। आर्थिक रूप से कमजोर परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन से एंबुलेंस की मांग की गई, लेकिन अस्पताल की ओर से कोई मदद नहीं मिली। इसके बाद, मजबूरी में परिजनों को निजी एंबुलेंस बुक करनी पड़ी और शव को 150 किलोमीटर दूर उनके गांव भेजने के लिए भारी खर्च उठाना पड़ा।

इस घटना से यह सवाल उठता है कि क्या मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने आवश्यक कदम उठाए और जरूरतमंद परिवारों के लिए एंबुलेंस सेवाएं सुनिश्चित कीं?


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