नैनीताल हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: दोहरी मतदाता सूची में नाम वाले नहीं लड़ सकेंगे पंचायत चुनाव
नैनीताल। उत्तराखंड में पंचायत चुनाव को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट ने बड़ा और निर्णायक आदेश जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने उस आदेश पर स्थगन (स्टे) लगा दिया है, जिसमें राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निकाय और ग्राम पंचायत – दोनों की मतदाता सूची में नाम दर्ज होने पर भी उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की अनुमति दी थी।
हाईकोर्ट की डबल बेंच ने साफ किया कि कोई भी व्यक्ति एक ही समय में शहरी और ग्रामीण – दोनों क्षेत्रों में चुनाव नहीं लड़ सकता। अदालत ने यह भी कहा कि दो अलग-अलग मतदाता सूचियों में नाम दर्ज होना केवल नियमों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह संविधान की भावना और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के खिलाफ है।
समाजसेवी शक्ति सिंह बर्वाल की याचिका पर आया फैसला
यह आदेश समाजसेवी शक्ति सिंह बर्वाल द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद आया। याचिका में कहा गया था कि उत्तराखंड में कई पंचायत चुनाव प्रत्याशियों के नाम शहरी निकाय (नगर निगम/नगर पंचायत) और त्रिस्तरीय पंचायत प्रणाली – दोनों की मतदाता सूची में दर्ज हैं।
याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया था कि जब भारत में दो अलग-अलग मतदाता सूचियों में नाम दर्ज होना अपराध की श्रेणी में आता है, तो फिर उत्तराखंड में ऐसे उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की अनुमति कैसे दी जा रही है?
प्रभावित होंगे कई उम्मीदवार
हाईकोर्ट के इस फैसले से उन सभी उम्मीदवारों को झटका लगा है, जिनके नाम नगर निकाय और ग्राम पंचायत – दोनों की वोटर लिस्ट में दर्ज हैं।
इससे पहले, ऐसे मामलों में रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा अलग-अलग फैसले दिए जा चुके हैं। कहीं ऐसे नामांकन स्वीकार किए गए, तो कहीं उन्हें खारिज भी किया गया। लेकिन अब हाईकोर्ट के इस स्पष्ट आदेश के बाद स्थिति एक समान और कानून सम्मत हो गई है।
राजनीतिक दलों और आयोग पर पड़ेगा दबाव
कोर्ट के इस फैसले के बाद अब राज्य निर्वाचन आयोग पर भी जिम्मेदारी बढ़ गई है कि वह चुनाव की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सभी प्रत्याशियों की मतदाता सूची की स्थिति की गंभीरता से जांच करे।राजनीतिक दलों के लिए भी यह एक चेतावनी है कि वे ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारने से बचें, जिनकी पात्रता विवादित हो सकती है।
