हरेला पर्व पर कपकोट में उमड़ा पारंपरिक उत्साह, 500 से अधिक पौधों का रोपण
🖊️ संवाददाता: सीमा खेतवाल
कपकोट (बागेश्वर), 16 जुलाई 2025 – उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक हरेला पर्व बुधवार को कपकोट में पारंपरिक उल्लास और सामाजिक एकता के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, जनप्रतिनिधि, सरपंच, प्रधान, पत्रकार, स्टूडेंट्स, कॉलेज के शिक्षक, वन विभाग के अधिकारी एवं एनडीआरएफ की टीम सहित क्षेत्र की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ की गई। महिलाओं ने पिछौड़ा पहनकर, टीका लगाकर और हुड़के की थाप पर पारंपरिक गीत गाकर उत्सव की शुरुआत की। उपस्थित जनसमूह ने एक-दूसरे को हरेला पर्व की शुभकामनाएँ दीं और पर्व की सामाजिक एवं पर्यावरणीय महत्ता पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण को केंद्र में रखते हुए 500 से अधिक पौधे लगाए गए। इनमें जामुन, आंवला, पांड़र जैसी स्थानीय जलवायु के अनुकूल फलदार प्रजातियाँ शामिल थीं, जो न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि क्षेत्र की आर्थिकी के लिए भी लाभदायक हैं।

पौधारोपण के दौरान “हरेला गीतों” की मधुर धुनें गूंजती रहीं और माहौल पूरी तरह हरियाली से सराबोर नजर आया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने मिलकर “चाँचरी नृत्य” किया और इस दौरान धरती माँ को हरित व सुरक्षित बनाए रखने का संकल्प भी लिया।
वन विभाग और एनडीआरएफ टीम की ओर से लोगों को जंगल बचाने, जैव विविधता को संरक्षित करने और पौधों की देखरेख की प्रेरणा दी गई। स्थानीय नागरिकों ने भी इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि हरेला पर्व केवल त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ाव का जीवंत प्रतीक है।
इस अवसर पर हरेला महोत्सव ने सामाजिक एकता, सांस्कृतिक जागरूकता और पर्यावरण सरंक्षण का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया, जिसे सभी ने एक प्रेरणादायी अनुभव के रूप में स्वीकार किया।
