उत्तराखंड में यूएलसीसी चिट फंड घोटाला: 92 करोड़ की ठगी का मामला अब सीबीआई के हवाले, प्रदेशभर में दर्ज हुए 13 मुकदमे
देहरादून/उत्तरकाशी/पौड़ी। उत्तराखंड में सामने आए अब तक के सबसे बड़े चिट फंड घोटालों में से एक यूएलसीसी चिट फंड घोटाले ने प्रदेश की जनता को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले में हजारों निवेशकों से लगभग 92 करोड़ रुपये की ठगी किए जाने का आरोप है। लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों और दर्ज हो रही एफआईआर के बाद अब यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपा जा रहा है।
प्रदेश के देहरादून, पौड़ी, उत्तरकाशी, टिहरी और रुद्रप्रयाग जैसे जिलों में इस मामले को लेकर अब तक 13 से अधिक मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के दौरान कुछ आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था। घोटाले के तरीके को देखकर पुलिस और प्रशासन को अंदेशा है कि यह एक संगठित वित्तीय अपराध है।
यूएलसीसी कंपनी ने केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देशभर में अपने नेटवर्क के ज़रिए निवेशकों को ठगने का काम किया। शुरुआती जांच के मुताबिक, इस फर्जी सहकारी समिति ने देशभर में करीब 189 करोड़ रुपये की ठगी की है। निवेशकों को सोना, तेल और विदेशी रिफाइनरियों में निवेश के नाम पर अधिक लाभ का लालच दिया गया।
उत्तराखंड में कंपनी की करीब 35 शाखाएं खोली गई थीं, जहां स्थानीय एजेंटों के ज़रिए लोगों से निवेश कराया गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बहुचर्चित घोटाले की CBI जांच के लिए अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। एबीपी लाइव से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा,
“देवभूमि उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर हम अडिग हैं। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, उन्हें उनके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।”
कई निवेशकों की रकम परिपक्व होने के बाद भी उन्हें पैसा नहीं लौटाया गया। जब शिकायतों का सिलसिला बढ़ा और लोग शाखाओं में जवाब मांगने पहुंचे, तो पाया गया कि कई ऑफिस बंद हो चुके हैं और प्रतिनिधि लापता हैं। इससे लोगों का आक्रोश बढ़ता गया और प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी, जिसके आधार पर राज्य सरकार ने अब मामले को केंद्रीय एजेंसी को ट्रांसफर करने का फैसला लिया है। सूत्रों के अनुसार, अगले कुछ दिनों में यह मामला औपचारिक रूप से CBI को सौंप दिया जाएगा।
