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उक्रांद का बड़ा आरोप, भाजपा प्रत्याशी का नामांकन रद्द करने की मांग

रचना बुटोला पर पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

पौड़ी गढ़वाल। उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) के केंद्रीय उपाध्यक्ष आशुतोष नेगी ने जिलाधिकारी एवं रिटर्निंग ऑफिसर, त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव, पौड़ी गढ़वाल, स्वाति भदौरिया को प्रत्यावेदन भेजकर भाजपा प्रत्याशी श्रीमती रचना बुटोला का नामांकन रद्द करने की मांग की है। नेगी ने आरोप लगाया है कि रचना बुटोला, तत्कालीन जिला पंचायत उपाध्यक्ष रहते हुए, एम/एस बुटोला एंटरप्राइजेज नामक फर्म के माध्यम से भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग में दोषी पाई गई हैं।

नेगी ने प्रत्यावेदन में लिखा है कि यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, भारतीय दंड संहिता/भारतीय न्याय संहिता और उत्तराखंड पंचायत राज अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है।

आरोपों के मुख्य बिंदु:

  1. तत्कालीन जिला पंचायत उपाध्यक्ष रचना बुटोला के पति प्रवीण बुटोला, एम/एस बुटोला एंटरप्राइजेज के मालिक/साझेदार हैं।

  2. इस फर्म को जिला पंचायत पौड़ी गढ़वाल के कई कार्यों के ठेके मिले और लाखों रुपये का भुगतान हुआ।

  3. निर्वाचित जनप्रतिनिधि होने के बावजूद, रचना बुटोला ने अपने पद के अधीन आने वाले निकाय से सीधे/अप्रत्यक्ष रूप से ठेके लिए, जो उत्तराखंड पंचायत राज अधिनियम के तहत अयोग्यता की श्रेणी में आता है।

  4. आरोप है कि पद का दुरुपयोग कर आर्थिक लाभ अपने परिवार को पहुंचाया गया, जो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक दुराचार है।

  5. टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रखी गई और हितों के टकराव (Conflict of Interest) को छुपाया गया।

  6. जांच में पुष्टि होने के बाद, जिला पंचायत पौड़ी के दो तदर्थ कनिष्ठ अभियंता — सुदर्शन सिंह रावत और आलोक रावत — को बर्खास्त कर दिया गया, क्योंकि उनकी पत्नियों की 25-25% हिस्सेदारी एम/एस बुटोला एंटरप्राइजेज में थी, जिसे उन्होंने विभाग से गोपनीय रखा था।

  7. इस फर्म को ₹1.47 करोड़ से अधिक के ठेकों का भुगतान किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि अभियंता आलोक रावत का भाई भी जिला पंचायत के कार्यों में ठेकेदार के रूप में शामिल था।

नेगी ने कहा कि बर्खास्त अभियंताओं पर लागू कानूनी प्रावधान, रचना बुटोला पर भी लागू होते हैं, क्योंकि उन्होंने अपने पति की कंपनी को सीधा आर्थिक लाभ पहुंचाया। उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की कि रचना बुटोला और प्रवीण बुटोला के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, भारतीय दंड संहिता/भारतीय न्याय संहिता और उत्तराखंड पंचायत राज अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर, भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्ति जब्त करने की संस्तुति की जाए।

नेगी ने चेतावनी दी कि यदि जिलाधिकारी स्तर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है, तो वे इस मामले में उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने के लिए मजबूर होंगे।


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