“घर-खेत और पशुपालन बचाओ” के नारे के साथ बागजाला में किसान महासभा का धरना
किसान महासभा का ऐलान – मांगें माने बिना खत्म नहीं होगा धरना
बागजाला गांव को पंचायत चुनाव से बाहर करना वोट चोरी है जो गलत और संविधान विरोधी है : क्लिफटन डी रोजारियो
हल्द्वानी। अखिल भारतीय किसान महासभा बागजाला ने 18 अगस्त से अपने पूर्व घोषित आंदोलन के तहत अपना घर, खेत,खेती, पशुपालन बचाने के लिए आज से बागजाला गांव की जनता की पेयजल, सड़क, विकास कार्यों और निर्माण कार्यों पर लगी रोक हटाने, जल जीवन मिशन योजना को शुरू करने, मालिकाना अधिकार देने, पंचायत प्रतिनिधि चुनने के अधिकार को बहाल करने जैसी मूलभूत नागरिक सुविधाओं की मांग को लेकर के समाधान को लेकर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया। किसान महासभा बागजाला ने घोषणा की कि जब तक मांगें मानी नहीं जाती तब तक धरना प्रदर्शन जारी रहेगा।

मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष आनन्द सिंह नेगी ने कहा कि, कल लालकुआं विधायक बागजाला आए थे, किसान महासभा ने उन्हें विधानसभा के मानसून सत्र में बागजाला को राजस्व गांव बनाने का प्रस्ताव पारित करने के लिए ज्ञापन दिया। लेकिन लगता है विधायक अपने तीन साल के कार्यकाल में पहली बार बागजाला में यहां समस्याओं का समाधान करने नहीं बल्कि भाजपा नेताओं के माध्यम से आज के अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन में बाधा डालने, डराने के लिए आए थे। इसका नजारा रात भर गांव के लोगों को आज के धरने में जबरिया रोकने कोशिश में देखने को मिला। लेकिन उसके खिलाफ आज बागजाला के लोगों ने जिस तरह से बड़ी संख्या भागदारी की और अपनी एकता दिखाई है वह स्वागत योग्य है। यह एक एक डरी हुई सरकार है, जो जनता को डराना चाहती है, इसका जवाब जनता की एकता है।
उन्होंने कहा कि, इस राज्य के मुख्यमंत्री गरीबों को उजाड़ने पर आमादा हैं। पहाड़ से लेकर मैदान तक गरीब जनता को अपनी जमीनों से बेदखल करने का काम भाजपा सरकार द्वारा किया जा रहा है। इसके लिए जनता को धार्मिक विभाजन की आग में झौंका जा रहा है, यह राज्य को विनाश की तरफ ले जाने वाला रास्ता है इसको बंद किया जाना चाहिए।
धरना प्रदर्शन के समर्थन में पहुंचे ऑल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन फॉर जस्टिस के राष्ट्रीय अध्यक्ष क्लिफटन डी रोजारियो ने कहा कि पूरे देश गरीबों, दलितों, अल्पसंख्यकों, आदिवासियों को उजाड़ने की नीति चल रही है। लेकिन इस देश का मालिक सरकार या बड़े पूंजीपति नहीं आम जनता है, उनको भूमि का अधिकार देना पड़ेगा। देश में वोट चोरी की तरह बागजाला गांव में भी पंचायत चुनाव में यहां की जनता की वोट चोरी हो रही है, यह बिल्कुल गलत है और संविधान विरोधी है। वोट का अधिकार संविधान ने दिया है, इसको हम अपने लॉयर्स एसोसिएशन के मंच पर भी उठाएंगे, पंचायत चुनाव में बागजाला गांव के वोट का अधिकार छीनने के खिलाफ हम हर कानूनी पहलू पर भी काम करेंगे।
किसान महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष बहादुर सिंह जंगी ने कहा कि, दशकों से बसे बागजाला के लोगों को स्टेडियम, चिड़ियाघर बनने और बस अड्डा, हाईकोर्ट आने की चर्चा के बाद इन बड़े प्रोजेक्ट के पास स्थित बागजाला की बेशकीमती जमीन को भाजपा की सरकार गरीबों, किसानों से छीनकर पूंजीपति बिल्डरों को देने का इरादा रखती है। जिसको सफल नहीं होने दिया जाएगा। इस लड़ाई को मंजिल तक पहुंचाया जाएगा।
भाकपा माले नैनीताल जिला सचिव डा कैलाश पाण्डेय ने कहा कि, जिले में बड़ी संख्या में लोग वन भूमि, नजूल भूमि पर बसे हैं जिन पर भाजपा की धामी सरकार के द्वारा उजाड़े जाने का खतरा मंडरा रहा है। मानवीय न्याय का तकाजा है कि जिन जमीनों पर दशकों पूर्व से लोग बस चुके हैं उन जमीनों को पक्का करके लोगों को मालिकाना अधिकार दिया जाए। जिले में किसी को भी उजाड़ा न जाय बल्कि बागजाला समेत सभी गरीबों को उनकी जमीन का मालिकाना अधिकार दिया जाना चाहिए।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में विमला देवी ने कहा कि, बागजाला के लोगों ने अपनी एकता के बल पर संघर्ष का रास्ता चुना है इसको मुकाम तक पहुंचाने तक लड़ाई जारी रहेगी।
गौरतलब है कि ब्रिटिश काल में 1925 से 1935 तक के फोरेस्ट प्लान में बागजाला का जिक्र किया गया है जिससेे यह सपष्ट होता है बागजाला गाँव का अस्तित्व इससे पहले से रहा है। बागजाला में बसे लोगों को 1978 में पट्टे आवंटित किये गए थे जिनका 30 साल में यानि 2008 में नवीनीकरण होना था परन्तु तत्कालीन भाजपा सरकार ने नवीनीकरण कराने के बजाय राजस्व गाँव बनाकर मालिकाना हक दिये जाने का जुमला उछाल कर नवीनीकरण करने से रोक दिया, लेकिन किया कुछ नहीं। 2017 से लगातार भाजपा फिर से सरकार में है परन्तु विधायिका में मालिकाना हक और राजस्व गाँव का विधेयक लाकर पास करने के बजाय गांव साम्प्रदायिक उन्माद खड़ा कर समाज में विभाजन की राजनीति को बढ़ाते हुए पीढ़ियों से अपनी रोजीरोटी कमा रहे बागजाला निवासियों को वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के नाम पर वर्ष 2023 में गांव में निर्माणाधीन 8 मकानों को वुलडोजर से जमींदोज करते हुए निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी गई। भाजपा सरकार के समय में ही बागजाला गांव को पंचायत चुनाव से बाहर किया गया। वर्ष 2024 में 100 से अधिक लोगों को नोटिस भी इसी सरकार के कार्यकाल में भेजे गए। तत्पश्चात् बागजाला के ग्रामीणों ने अखिल भारतीय किसान महासभा के साथ संगठित होकर किसान महापंचायत कर बागजाला वासियों ने नागरिक अधिकार और मूलभूत सुविधाओं को बहाल करने के लिए जनान्दोलन किया तब जाकर नोटिस आने बंद हुए परन्तु सरकार द्वारा नागरिक अधिकार और जन सुविधायें प्रदान करने के अभी तक नहीं हुआ है इसलिए यहां के लोगों को अनिश्चिकालीन धरना प्रदर्शन को बाध्य होना पड़ा।
अनिश्चिकालीन धरना प्रदर्शन की 8 सूत्रीय मांगें:
1. अतिक्रमण हटाने के नाम पर ग्रामीणों को दिये गये नोटिस रद्द करो !
2. निर्माण कार्यों में लगी रोक खत्म करो !
3. जल जीवन मिशन द्वारा हर घर नल, हर घर जल योजना के निर्माण में तोड़ी गई सड़कों की मरम्मत और कच्ची सड़कों का डामरीकरण या सीमेंट – कंक्रीट से पक्की सड़क का निर्माण करो !
4. जल जीवन मिशन की रोकी गयी योजना हर घर नल, हर घर जल योजना को तत्काल शुरू करो !
5. पंचायत चुनाव से बाहर किये गए बागजाला के ग्रामीणों को फिर से ग्राम पंचायत का अधिकार देकर मतदाता सूची में सूचीबद्ध करना सुनिश्चित करो !
6. बागजाला के ग्रामीणों को जो जहाँ पर काबिज है वहीं मालिकाना हक देने के लिए विधानसभा से विधिवत प्रस्ताव पारित कर राजस्व गाँव का शीघ्रातिशीघ्र निर्माण करो !
7. गोवंश संरक्षण अधिनियम के चलते गोवंश की बिक्री पर लगी रोक से पशुपालकों, किसानों, राहगीरों और सड़क दुर्घटनाओं में हो रहे जनधन के नुकसान को रोकने के लिए गोवंश की स्थितिनुसार सरकारी कीमत निर्धारित कर सरकारी खरीद पक्की करो !
8. बागजाला समेत नैनीताल जिले में वन भूमि, नजूल भूमि पर बसे सभी लोगों को मालिकाना अधिकार दिया जाय।
धरना प्रदर्शन के पहले दिन अध्यक्षता विमला देवी ने और संचालन सचिव वेद प्रकाश ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष आनन्द सिंह नेगी, ऑल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन फॉर जस्टिस के राष्ट्रीय अध्यक्ष क्लिफटन डी रोजारियो, वरिष्ठ किसान नेता बहादुर सिंह जंगी, जिला अध्यक्ष भुवन जोशी, भाकपा माले नैनीताल जिला सचिव डा कैलाश पाण्डेय, ट्रेड यूनियन ऐक्टू के प्रदेश महामंत्री के के बोरा, किसान नेता विमला रौथाण, किशन बघरी, प्रेम सिंह नयाल, दीवान सिंह बर्गली, ललित मटियाली, पंकज चौहान, मीना भट्ट, हरिदित्ता सिंह, आइसा जिला अध्यक्ष धीरज कुमार, रियासत हुसैन, उवैस, गोपाल राम, कमल जोशी, चन्दन सिंह मटियाली, अंबा दत्त, हरक सिंह बिष्ट, सुल्तानगरी से समर्थन में आए मोहन सिंह बिष्ट और लच्छी राम, मोहन राम, ऋषि मटियाली, केशव राम, परवेज, युगल किशोर, सलीम, वासुदेव, दीवान सिंह नेगी, अजय यादव, आदित्य गुप्ता, भगवती गोस्वामी, पुष्पा भट्ट, सरोज, सीमा राजपूत, बचुली देवी, फिजा, जेबा, हेमा देवी, कल्पना, आरती, रानी, दिनेश पांडे, इदरीस, नैन सिंह, नंद राम, सलीम अहमद, सविता, पिंकी, चेतन आदि समेत बड़ी संख्या में बागजाला गांव के ग्रामीण शामिल रहे।
