👉 निजी अस्पतालों ने मान ली वरिष्ठ नागरिक समिति की मांग
अब हल्द्वानी में कार्डधारकों के लिए उपचार में नहीं वसूले जाएंगे अतिरिक्त शुल्क
हल्द्वानी । मुख्य चिकित्सा अधिकारी नैनीताल डॉ. हरिश्चंद्र पंत की अध्यक्षता में शुक्रवार को उनके कैंप कार्यालय हल्द्वानी में निजी चिकित्सालयों के प्रतिनिधियों और वरिष्ठ नागरिक जनकल्याण समिति हल्द्वानी के पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में समिति के अध्यक्ष भुवन भास्कर पांडे और महामंत्री डी.के. पांडे ने भाग लिया। इसमें गोल्डन कार्ड, आयुष्मान कार्ड और वयवंदन कार्ड धारकों को चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक में यह सहमति बनी कि अब हल्द्वानी के सभी अनुबंधित निजी चिकित्सालय गोल्डन कार्ड धारकों का उपचार शासनादेश संख्या 1256 दिनांक 25 नवंबर 2021 के तहत सीजीएचएस दरों पर करेंगे। इसके लिए मरीज को उपचार से पहले अपना गोल्डन कार्ड प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। इसी तरह आयुष्मान और वयवंदन कार्ड धारकों को आईपीडी में भर्ती होने से तीन दिन पूर्व और डिस्चार्ज के बाद पंद्रह दिन तक का खर्च पूरी तरह निःशुल्क रहेगा। सभी निजी अस्पताल अपने मुख्य द्वार पर बोर्ड लगाकर इन कार्ड धारकों को मिलने वाली सुविधाओं का विवरण सार्वजनिक करेंगे। इसके अलावा मरीजों को अस्पताल परिसर के मेडिकल स्टोर से ही दवाएं खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। ओपीडी बीजक सत्यापन के लिए यह भी तय किया गया कि डीडीओ द्वारा भेजे गए बिलों का सत्यापन मुख्य चिकित्सा अधिकारी या अधीक्षक स्तर से अधिकतम दस दिनों के भीतर किया जाएगा।

ठक में चिकित्सा विभाग से अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्वेता भंडारी और डॉ. एल.एस. मेहता मौजूद रहे, जबकि शहर के वेदांता हॉस्पिटल, अग्रवाल नर्सिंग होम, चंदन हॉस्पिटल, दृष्टि आई हॉस्पिटल, सुभानु आई हॉस्पिटल, बॉम्बे हॉस्पिटल, नीलकंठ हॉस्पिटल, स्टार हॉस्पिटल, साँई हॉस्पिटल, सेंट्रल हॉस्पिटल, एस.के. नर्सिंग होम, ज्योति हॉस्पिटल और आई.क्यू. विजन सहित कई अस्पतालों के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय भागीदारी की।
बैठक के अंत में वरिष्ठ नागरिक जनकल्याण समिति के अध्यक्ष भुवन भास्कर पांडे ने ओपीडी में सीजीएचएस दरों पर उपचार की लंबे समय से चली आ रही मांग का समाधान निकालने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिश्चंद्र पंत का आभार व्यक्त किया। माना जा रहा है कि इस निर्णय से हल्द्वानी और आसपास के हजारों मरीजों को सीधा लाभ मिलेगा और चिकित्सा सुविधाओं को लेकर पारदर्शिता बढ़ेगी।
