कनारीछीना में स्वास्थ्य और पशु सेवा व्यवस्था ठप, ग्रामीणों को झेलनी पड़ रही भारी दिक्कतें
संवाददाता सीमा खेतवाल

अल्मोड़ा। भैसियाछाना विकासखंड के अंतर्गत आने वाला कनारीछीना क्षेत्र स्वास्थ्य और पशु सेवाओं की बदहाली से जूझ रहा है। पिछले 12 महीनों से कनारीछीना पशु सेवा केंद्र पूरी तरह बंद पड़ा है, जबकि कनारीछीना एलोपैथिक अस्पताल पिछले 18 महीनों से केवल एक फार्मासिस्ट के भरोसे संचालित हो रहा है।
पूर्व में अस्पताल में आयुर्वेदिक डॉक्टर और आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट की तैनाती थी, लेकिन विभाग ने उन्हें धौलछीना में अटैच कर दिया। इतने लंबे समय बीत जाने के बाद भी अस्पताल में किसी भी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं हो पाई है। नतीजतन ग्रामीणों को गंभीर बीमारियों या सामान्य उपचार के लिए 50–60 किलोमीटर दूर अल्मोड़ा जाना पड़ता है।
इसी तरह पशु सेवा केंद्र भी पिछले एक साल से बंद पड़ा है। पहले यहां पशु चिकित्सा अधिकारी कार्यरत थे, लेकिन अब केंद्र पर ताले लटके हैं। पशुओं के इलाज और दवाओं के लिए ग्रामीणों को धौलछीना का रुख करना पड़ता है।
स्थानीय ग्रामीण प्रताप सिंह नेगी ने बताया कि कनारीछीना पशु सेवा केंद्र और एलोपैथिक अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति से पांच–छह ग्राम पंचायतों की जनता बेहद परेशान है। बीमार पशुओं की देखरेख के साथ-साथ इंसानों की स्वास्थ्य सुविधा पूरी तरह चरमरा गई है।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से जल्द से जल्द डॉक्टरों की नियुक्ति और पशु सेवा केंद्र को पुनः शुरू करने की मांग की है।
