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छह जिलों में एक ही नाम से सरकारी नौकरी, आधार नंबरों से हुआ बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर

आगरा/लखनऊ – एक तरफ देश में लाखों युवा एक अदद सरकारी नौकरी के लिए वर्षों मेहनत करते हैं, और दूसरी ओर आगरा का एक युवक फर्जी दस्तावेजों के दम पर छह जिलों में एक साथ सरकारी नौकरी करता रहा। इस हैरान कर देने वाले फर्जीवाड़े का खुलासा होते ही प्रदेशभर में सरकारी भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।

मामला आगरा के शाहगंज निवासी अर्पित सिंह पुत्र अनिल कुमार सिंह से जुड़ा है, जिसने अलग-अलग जिलों में अलग-अलग आधार नंबरों का उपयोग कर नौकरी हासिल की। हर जगह नाम, पिता का नाम और पता एक ही था, लेकिन आधार नंबर अलग-अलग। इसी विसंगति ने पूरे घोटाले का भंडाफोड़ कर दिया।

अब तक बलरामपुर, फर्रुखाबाद, रामपुर, बांदा, अमरोहा और शामली जिलों में आरोपी के खिलाफ मुकदमे दर्ज हो चुके हैं और पुलिस जांच कर रही है।

जांच में सामने आया है कि अर्पित सिंह ने विभिन्न जिलों में निम्न आधार नंबरों का उपयोग कर नौकरी प्राप्त की:

अमरोहा: आधार संख्या 3398 0733 7433, निवासी – नगला खुबानी, कुरावली, मैनपुरी शामली: आधार अप्रमाणित, निवासी – आगरा

बलरामपुर: आधार संख्या 5254 4916 2718, निवासी – शाहगंज, आगरा

फर्रुखाबाद: आधार संख्या 5008 0779 9459, वही पता

रामपुर: आधार संख्या 8970 2777 15487

बांदा: आधार संख्या 4968 2215 8342

हर जिले में आधार और अन्य दस्तावेज अलग-अलग होने के बावजूद वह वर्षों तक नौकरी करता रहा, और किसी विभाग को भनक तक नहीं लगी।

परिवार का बयान: “हमें कुछ नहीं पता था”

आरोपी के पिता अनिल कुमार सिंह ने बताया कि अर्पित की पहली नौकरी 2016 में हाथरस जिले में लगी थी। उन्होंने बताया, “उसने गाजियाबाद से डिप्लोमा किया था। हमें इस फर्जीवाड़े की जानकारी अखबार में खबर पढ़ने के बाद हुई। हम चाहते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो।”

संगठित गिरोह की आशंका, भर्ती तंत्र पर गंभीर सवाल

पुलिस का मानना है कि अर्पित इस घोटाले में अकेला नहीं है। संभावना जताई जा रही है कि उसके पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा था, जो आधार की हेराफेरी और दस्तावेजों की जालसाजी के जरिये भर्ती प्रक्रिया को गुमराह कर रहा था।

इतने वर्षों तक अलग-अलग जिलों में नौकरी करते रहना यह दर्शाता है कि सिस्टम में भारी चूक और लापरवाही बरती गई। ना सिर्फ भर्ती एजेंसियां, बल्कि विभागीय सत्यापन प्रणाली भी पूरी तरह विफल साबित हुई।

प्रश्नों के घेरे में सरकारी व्यवस्था

यह मामला न केवल एक व्यक्ति के अपराध को उजागर करता है, बल्कि सरकारी भर्ती और पहचान सत्यापन प्रणाली की गंभीर खामियों को भी सामने लाता है।

सबसे बड़ा सवाल यही है –

➡️ एक ही व्यक्ति छह जगह कैसे नियुक्त हो गया?

➡️ किस आधार पर उसका सत्यापन हुआ?

➡️ क्या विभागों ने कभी सेवा पुस्तिका या दस्तावेज़ों का मिलान नहीं

किया?

➡️ आधार जैसी ‘अद्वितीय पहचान प्रणाली’ इतनी आसानी से कैसे धोखा खा गई?


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