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देहरादून बादल फटने की त्रासदी: मुरादाबाद के एक ही गांव के पांच लोगों की अर्थियां उठीं, पूरे क्षेत्र में पसरा मातम

देहरादून में मंगलवार सुबह बादल फटने से हुई भीषण त्रासदी ने मुरादाबाद के मुड़िया जैन गांव को गहरे शोक में डुबो दिया है। इस हादसे में 12 मजदूर बह गए थे, जिनमें से अब तक सात शव बरामद हो चुके हैं। इनमें दो मासूम बच्चों समेत पांच लोग एक ही परिवार के बताए जा रहे हैं।

बुधवार को जब उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश प्रशासनिक अमला शवों को गांव लेकर पहुंचा तो पूरा इलाका गमगीन हो गया। पांच अर्थियां एक साथ उठते ही गांव का माहौल विलाप में बदल गया। ज्यादातर घरों में चूल्हे नहीं जले और चारों ओर मातम छा गया।

जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह देहरादून के विकासनगर क्षेत्र में बादल फटने से टोंस नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। तेज बहाव में मुरादाबाद और संभल के मजदूरों से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली बह गई। इस हादसे में मुरादाबाद के 12 और संभल के 2 लोग नदी की तेज धारा में समा गए।

अब तक सात शव एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों ने बरामद कर लिए हैं, जबकि बाकी की तलाश जारी है।

मुरादाबाद जिले से जिलाधिकारी अनुज सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सतपाल अंतिल गांव पहुंचे और परिजनों को ढांढस बंधाया। उत्तराखंड प्रशासन की टीम भी शवों को गांव तक लेकर आई।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है। साथ ही शवों के पैतृक गांव तक लाने और अंतिम संस्कार की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।

मुरादाबाद प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार हादसे में जान गंवाने वालों में मदन सैनी (45), नरेश (48), हरचरन (60), सोमवती (55), रीना (31) पत्नी होराम और किरन (35) पत्नी अमरपाल शामिल हैं, जो सभी गांव मुड़िया जैन, सोनकपुर, मुरादाबाद के निवासी थे। लापता लोगों में राजकुमार (पुत्र हरचरन), होराम (पुत्र हरचरन) और सुंदरी (पत्नी मदनलाल) के नाम दर्ज हैं, जबकि घायलों में अमरपाल (42 वर्ष, पुत्र गिरवर) और अमन (7 वर्ष, पुत्र नरेश) शामिल हैं।

गांव के लोग हादसे की चर्चा करते हुए गम में डूबे हैं। पांच अर्थियां एक ही घर से उठने का दृश्य इतना हृदयविदारक था कि मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।

यह त्रासदी एक बार फिर पहाड़ों में प्राकृतिक आपदाओं के भयावह रूप और वहां काम करने आने वाले मजदूरों की असुरक्षा को उजागर करती है।

 


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