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विशाल “भूमि अधिकार सम्मेलन” सम्पन्न, आंदोलन तेज करने की घोषणा

मालिकाना अधिकार मिलने तक जारी रहेगा संघर्ष, कुमाऊं कमिश्नर कार्यालय घेराव की चेतावनी

हल्द्वानी। अखिल भारतीय किसान महासभा बागजाला कमेटी की ओर से शनिवार को बुधपार्क, हल्द्वानी में विशाल “भूमि अधिकार सम्मेलन” आयोजित किया गया। 33 दिन से गांव में चल रहे अनिश्चितकालीन धरने के बावजूद सरकार और प्रशासन की उपेक्षा के विरोध में 34वें दिन यह सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन से सर्वसम्मति से घोषणा हुई कि जब तक वन भूमि और नजूल भूमि पर बसे लोगों को मालिकाना हक नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

सम्मेलन में बागजाला के अलावा सुल्तानगरी, पुछड़ी रामनगर, दानी बंगर, बिंदुखत्ता, भूड़ा खत्ता, टांडा खत्ता, बनभूलपुरा, दमुआढुंगा आदि इलाकों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। अंत में उपजिलाधिकारी हल्द्वानी के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर मांग की गई कि राज्य सरकार सभी पात्र लोगों को भूमि पर मालिकाना अधिकार दे।

सम्मेलन में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित हुआ कि यदि सरकार ने वन व नजूल भूमि पर दशकों से रह रहे परिवारों को मालिकाना अधिकार नहीं दिया, तो मुख्यमंत्री के सचिव के रूप में कार्यरत कुमाऊं कमिश्नर कार्यालय का घेराव किया जाएगा। इसकी तिथि जल्द घोषित की जाएगी।

भाकपा (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि गरीबों को उजाड़ने और अमीरों की जेब भरने की नीति इस सरकार का असली चरित्र है। उन्होंने आरोप लगाया कि मसूरी में बड़े उद्योगपतियों को औने-पौने दाम पर जमीन दी जा रही है जबकि गरीब जनता को उजाड़ने की तैयारी की जा रही है। जमीन पर मालिकाना हक पाने के लिए बड़ी एकता और मजबूत आंदोलन की जरूरत है।

किसान नेता किशन बघरी (बिंदुखत्ता) ने कहा कि सरकार राजस्व गांव के मामले में जनता को गुमराह कर रही है। सभी खत्ता वासियों और वन भूमि वासियों को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।

किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष आनन्द सिंह नेगी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिनिधिमंडल से मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है। अब संघर्ष को आगे बढ़ाकर मालिकाना हक पर ठोस घोषणा करवाना ही लक्ष्य होगा।

सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ किसान नेता बहादुर सिंह जंगी ने की और संचालन किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष आनन्द सिंह नेगी ने किया।

सम्मेलन में इंद्रेश मैखुरी, यतीश पंत, के.के. बोरा, डॉ. उर्मिला रैस्वाल, वेद प्रकाश, विमला देवी, कुंदन सिंह मेहता, इस्लाम हुसैन, जी.आर. टम्टा, मुकेश बौद्ध, नफीस अहमद खान, किशन बघरी, बची सिंह कपकोटी, विमला रौथाण, हेमा देवी, पुष्कर दुबड़िया, गोविन्द जीना, प्रकाश फुलेरिया, एडवोकेट गंगा प्रसाद, सुमित कुमार, हयात सिंह बिष्ट, मोहन सिंह बिष्ट, दीपक चन्याल, आर.पी. गंगोला, जुबैर, तस्लीम अंसारी, चन्दन, शेखर, गजेंद्र पाल सिंह, पुष्कर सिंह दानू, गिरधर बम, रमेश कुमार, प्रदीप बथ्याल, हरीश चन्द्र, सुन्दर लाल बौद्ध, दीवान सिंह बर्गली, परवेज, मीना भट्ट, डॉ. कैलाश पाण्डेय, भोला सिंह, नसीर अहमद, प्रेम सिंह नयाल, हरक सिंह बिष्ट, दौलत सिंह कुंजवाल, पुष्पा पाल, अनीता, भगवती, हीरा देवी, विमला पांडे, नीलम आर्य, सुनीता देवी, दिनेश चन्द्र, रेखा देवी, शांति देवी सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।


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