पछास ने पुलिस की अमानवीय कार्रवाई पर जताया रोष, आंदोलन तेज करने की दी चेतावनी
छात्र आंदोलन में पुलिसिया दमन का आरोप, महिलाओं के साथ अभद्रता की शिकायत
हल्द्वानी। परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) ने बुद्ध पार्क, तिकोनिया, हल्द्वानी में पेपर लीक के खिलाफ चल रहे आंदोलन के दौरान भूख हड़ताल पर बैठे छात्र भूपेंद्र कोरंगा को पुलिस द्वारा “अमानवीय तरीके से जबरन” उठाए जाने की कड़ी निंदा की है। पछास ने आरोप लगाया है कि इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने गाली-गलौज की और महिलाओं के कपड़े भी फाड़ दिए, जिसे उन्होंने “मित्र पुलिस का असली और अमानवीय चेहरा” बताया है।
आपको बताते चले कि छात्र-नौजवान 21 सितंबर को हुए पेपर लीक के खिलाफ आंदोलनरत हैं। उनकी मुख्य मांगें इन लीक हुए पेपरों की परीक्षा दोबारा कराने और पूरे मामले की पारदर्शी ढंग से निष्पक्ष सीबीआई जांच कराने की हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएँ रोकी जा सकें। हल्द्वानी में यह अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन और भूख हड़ताल 25 सितंबर से चल रही थी।
पछास ने यह भी आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री और भाजपा कार्यकर्ता आंदोलन को “पेपर जिहाद” और “यह छात्र नहीं हैं” जैसे बयानों से भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। संगठन ने सवाल उठाया है कि पेपर लीक के खिलाफ कठोर कानून बनाने की बात करने वाले मुख्यमंत्री यह जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं कि कानून के बावजूद भी पेपर लीक कैसे हो रहे हैं। पछास का स्पष्ट मानना है कि कानून होने के बावजूद पेपर लीक होना “सरकारी संरक्षण” में होने का संकेत है, जिसके खिलाफ छात्र-युवा आंदोलित हैं।
पछास ने भूपेंद्र कोरंगा को जबरन उठाने और छात्राओं-महिलाओं के साथ अभद्रता करने, कपड़े फाड़ने की घटना के खिलाफ रोष व्यक्त किया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि वह छात्रों की मांगों— निष्पक्ष सीबीआई जांच, परीक्षाओं को दोबारा करवाने और पेपर लीक की घटनाओं पर रोक — के साथ मजबूती से खड़ा है, और इस घटना के विरोध में अपने आंदोलन को और अधिक जुझारू ढंग से तेज करेगा।
