भीमताल CHC: ‘रेफरल सेंटर’ का नक़ाब! 😱 35,000 की जान ख़तरे में, क्या सरकार सिर्फ़ ‘रेफ़र’ करके पीछा छुड़ाएगी?
जहां इलाज़ नहीं ‘इंतज़ार’ मिलता है; सुविधाओं के नाम पर केवल ‘रेफरल’ का ठप्पा!
जिलाधिकारी और CDO को सौंपा गया CM के नाम ज्ञापन, घोषणा न हुई तो आर-पार का आंदोलन!

भीमताल (नैनीताल)। उत्तराखंड की देवभूमि में स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत चौंकाने वाली है! नैनीताल जिले का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) भीमताल अब सरकारी अस्पताल कम और मरीजों के लिए ‘रेफरल सेंटर’ ज्यादा बन गया है। आलम यह है कि 35,000 से अधिक लोगों की आबादी को कवर करने वाला यह अस्पताल, सुविधाओं के अभाव में केवल ‘मौत का टिकट’ काट रहा है, जहाँ से मरीजों को इलाज के लिए सीधे हल्द्वानी या नैनीताल धकेल दिया जाता है।
एक्स-रे भी ‘वीआईपी’ सेवा, अल्ट्रासाउंड का नामोनिशान नहीं
क्षेत्र के प्रधान संगठन और राज्य आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सीधा हमला बोला है:
अल्ट्रासाउंड का पूर्ण अभाव: सबसे गंभीर बात यह है कि अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा बिल्कुल नहीं है! यानी, प्रसव पीड़ा से जूझ रही गर्भवती महिलाएँ भगवान भरोसे हैं। उन्हें आपातकाल में भी कई किलोमीटर दूर हल्द्वानी की धूल फाँकने पर मजबूर किया जाता है, जिससे जच्चा-बच्चा दोनों की जान हर पल खतरे में रहती है।
एक्स-रे: सप्ताह में केवल 3 दिन की ‘शाही’ सेवा: मामूली एक्स-रे के लिए भी मरीजों को तरसना पड़ता है, क्योंकि यह सुविधा सप्ताह में केवल तीन दिन ही उपलब्ध है। बाकी चार दिन मरीज केवल इंतजार करते हैं या निजी लैब में मोटी रकम चुकाने को मजबूर होते हैं।

ग्राम प्रधान संगठन भीमताल की संरक्षक राधा कुल्याल और राज्य आंदोलनकारी प्रेम सिंह कुल्याल ने सरकार को सीधी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, “एक तरफ सरकार राज्य स्थापना की रजत जयंती मना रही है, और दूसरी तरफ भीमताल में लोग स्वास्थ्य की मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। क्या मुख्यमंत्री जी को इस 35,000 की आबादी की चिंता नहीं है?”

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि आगामी राज्य स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री ने सीएचसी भीमताल को उप जिला चिकित्सालय बनाने की घोषणा नहीं की, तो समस्त क्षेत्रवासी चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने ‘भीमताल सीएचसी बचाओ’ आंदोलन की घोषणा करते हुए कहा कि तब तक लड़ाई जारी रहेगी, जब तक हर गरीब को उसके घर के पास जीवनदान देने वाली स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल जाती।
