देहरादून में बिल्डरों और शराब कारोबारियों पर आयकर का बड़ा एक्शन, इन्वेस्टिगेशन विंग ने गोपनीयता में की कार्रवाई
देहरादून। उत्तराखंड में आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग ने गुरुवार को बिल्डरों और शराब कारोबारियों के ठिकानों पर बड़ी छापेमारी की। यह कार्रवाई पूरी तरह गोपनीय रखी गई, ताकि किसी भी तरह की सूचना पहले से लीक न हो सके।
सूत्रों के अनुसार, छापेमारी में केवल इन्वेस्टिगेशन विंग के अधिकारियों और कर्मचारियों को शामिल किया गया। सामान्य तौर पर ऐसी बड़ी कार्रवाई में असेसमेंट विंग के अधिकारी भी भाग लेते हैं, लेकिन इस बार गोपनीयता बनाए रखने के लिए केवल इन्वेस्टिगेशन टीम को ही जिम्मेदारी दी गई।
राज्यभर से करीब 100 अधिकारियों और कर्मचारियों की एक विशेष टीम तैयार की गई, जिन्होंने अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। बताया जा रहा है कि यह छापा लंबे समय से चल रही निगरानी और गोपनीय तैयारी का परिणाम है।
बिल्डर इंदर खत्री के प्रोजेक्ट पर जांच केंद्रित
आयकर सूत्रों के अनुसार, जांच टीम ने डोईवाला के लाल तप्पड़ क्षेत्र में बिल्डर इंदर खत्री के निर्माणाधीन आलीशान होटल और उससे जुड़ी संपत्तियों की जांच की। टीम ने होटल निर्माण में उपयोग किए जा रहे धन के स्रोत और संबंधित लेनदेन का बारीकी से परीक्षण किया।
प्रारंभिक जांच में ऐसे कई संदिग्ध ट्रांजेक्शन मिले हैं, जो न तो बिल्डरों और न ही शराब कारोबारियों के आयकर रिटर्न में दर्शाए गए थे। विभाग ने इन कारोबारियों के पिछले कई वर्षों के रिटर्न का मिलान किया और जब बार-बार अनियमितताएं सामने आईं, तो टीम ने एक ठोस रणनीति बनाकर कार्रवाई की।
रियल एस्टेट और शराब कारोबार में काला धन खपाने के सुराग
आयकर सूत्रों के मुताबिक, कुछ लेनदेन रियल एस्टेट और शराब कारोबारियों के बीच आपसी साझेदारी में हुए हैं। विभाग ने जब कड़ी से कड़ी जोड़ी, तो कई बड़े नाम सामने आए।
बताया जा रहा है कि बिल्डरों के ठिकानों से जब्त दस्तावेजों में कुछ राजनेताओं और अफसरों की संभावित हिस्सेदारी के संकेत भी मिले हैं। इस संबंध में विभाग द्वारा गहन पूछताछ की जा रही है, हालांकि अधिकारियों ने अब तक किसी नाम की पुष्टि नहीं की है।
काला धन खपाने के सुरक्षित ठिकाने बने ये सेक्टर
विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तराखंड में लंबे समय से रियल एस्टेट और शराब कारोबार काला धन निवेश का सुरक्षित माध्यम माने जाते हैं। इन क्षेत्रों में अधिकतर सौदे नकद में होने के कारण आयकर चोरी की संभावना अधिक रहती है।
विभाग का मानना है कि खरीद-बिक्री की लंबी चेन में किसी न किसी बिंदु पर साक्ष्य मिल ही जाते हैं, और इसी के आधार पर मुख्य कड़ी तक पहुंचना संभव होता है।
आयकर विभाग की यह कार्रवाई राज्य में अब तक की सबसे गोपनीय और संगठित छापेमारी मानी जा रही है। सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में विभाग कुछ और बड़े नामों का खुलासा कर सकता है।
