संयुक्त संघर्ष समिति ने तराई पश्चिमी वन प्रशासन पर बुलडोजर कार्रवाई को लकेर लगाये गंभीर आरोप
रामनगर। उत्तराखंड में एक बार फिर ‘बुलडोजर कार्रवाई’ को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। संयुक्त संघर्ष समिति ने तराई पश्चिमी वन प्रशासन पर देश के सर्वोच्च न्यायालय और उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेशों की खुलेआम अवहेलना करने का गंभीर आरोप लगाया है। समिति का कहना है कि वन विभाग कानून और न्यायालय के आदेशों को दरकिनार कर किसानों की जमीन पर जबरन कब्जा कर रहा है।
ग्राम कालू सिद्ध में आयोजित बैठक में समिति के संयोजक किशन शर्मा ने बताया कि 24 दिसंबर को तराई पश्चिमी वन प्रशासन ने ग्राम पूछड़ी में बालादत्त कांडपाल के खेत में बुलडोजर और ट्रैक्टर चलाकर उनकी गेहूं और लहसुन की फसल को पूरी तरह रौंद दिया। इतना ही नहीं, उनके खेत में लगे 12 आम के पेड़ों को उखाड़कर जमीन समतल कर कब्जा कर लिया गया, जबकि इस जमीन पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय का स्पष्ट स्टे ऑर्डर लागू था।
बैठक में सरस्वती जोशी ने प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उत्तराखंड में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। उन्होंने बताया कि ग्राम पूछड़ी निवासी प्रवीण को तराई पश्चिमी वन विभाग द्वारा बेदखली का नोटिस दिया गया था, लेकिन नोटिस पर कोई अंतिम निर्णय लिए बिना ही वन प्रशासन ने उनके खेत पर कब्जा कर लिया और जमीन पर गड्ढे कर दिए।
सरस्वती जोशी ने यह भी कहा कि ग्राम पूछड़ी में वन अधिकार कानून 2006 के तहत वनाधिकार समिति का गठन किया जा चुका है। इस कानून में साफ प्रावधान है कि जब तक ग्रामीणों के दावों की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी ग्रामीण को बेदखल नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद वन प्रशासन न हाईकोर्ट के आदेश मान रहा है और न ही संसद द्वारा बनाए गए कानून को।
संयुक्त संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि अब ग्रामीणों के पास संगठित संघर्ष के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। बैठक में ग्रामीणों ने 4 जनवरी को रामनगर में प्रस्तावित उत्तराखंड स्तरीय जन सम्मेलन को अपना समर्थन देते हुए बड़ी संख्या में शामिल होने का ऐलान किया। यह सम्मेलन कथित ‘बुलडोजर राज’ के खिलाफ आयोजित किया जा रहा है।
बैठक में शांति देवी, ठाकुर दत्त रेखाड़ी, धना, उमाकांत ध्यानी, ममता मोहन सिंह, दीपा, कमला, गीता, हंसी, लीला देवी, पुष्पा, आशा समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
