राजस्व न्यायालयों की बदहाली पर अधिवक्ताओं का फूटा गुस्सा
डीएम कार्यालय में धरना, 11 फरवरी से अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी
नैनीताल। राजस्व न्यायालयों सहित विभिन्न प्रशासनिक प्राधिकरणों में व्याप्त अनियमितताओं और अव्यवस्थाओं के विरोध में मंगलवार को अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में जोरदार धरना प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद न तो व्यवस्थाओं में सुधार हुआ और न ही जिम्मेदार अधिकारियों ने गंभीरता दिखाई।
धरने की सूचना मिलते ही मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अरविंद पांडेय मौके पर पहुंचे और अधिवक्ताओं से वार्ता कर जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन प्राप्त किया। धरने को संबोधित करते हुए अधिवक्ताओं ने बताया कि इससे पहले दो बार जिलाधिकारी को लिखित पत्र सौंपे जा चुके हैं, लेकिन राजस्व न्यायालयों की स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है।
अधिवक्ताओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कई राजस्व न्यायालयों में बिना किसी वैधानिक अधिकार के बाहरी लोग कार्य कर रहे हैं। वहीं, संबंधित अधिकारी निर्धारित समय पर न्यायालयों में उपस्थित नहीं होते, जिससे न्यायिक कार्य बाधित हो रहा है।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पत्रावलियों में क्रमांक अंकित नहीं किए जा रहे हैं और पटवारी व कानूनगो समय से रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर रहे, जिसके कारण वादकारियों को अनावश्यक रूप से चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
धरने में शामिल अधिवक्ताओं ने अधिकारियों के रवैये पर कड़ा ऐतराज जताते हुए स्पष्ट किया कि अधिवक्ता समुदाय के सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनका कहना था कि विभिन्न प्राधिकरण कार्यालयों में फाइलों को जानबूझकर लटकाया जा रहा है, जिससे आम जनता और अधिवक्ताओं दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस दौरान सीडीओ अरविंद पांडेय ने ज्ञापन लेते हुए जिलाधिकारी से तत्काल वार्ता कर समस्याओं के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। हालांकि अधिवक्ताओं ने साफ कर दिया कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
बार एसोसिएशन के सचिव दीपक रुबाली ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने अब भी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो हल्द्वानी और रामनगर बार एसोसिएशन के सहयोग से 11 फरवरी से अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा। दोनों बार एसोसिएशनों ने नैनीताल बार को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है।
धरना प्रदर्शन में बार एसोसिएशन अध्यक्ष भगवत प्रसाद सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे, जिन्होंने एक स्वर में न्यायालयी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई।
