देशभर में पुरुष आयोग की मांग को लेकर आंदोलन तेज, अल्मोड़ा से उठा समर्थन
अल्मोड़ा (उत्तराखंड)।देशभर में पुरुष आयोग के गठन की मांग को लेकर आंदोलन तेज होता जा रहा है। अलग-अलग राज्यों और शहरों में विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा इस मांग को लेकर प्रदर्शन और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।

अश्लीलता मुक्त भारत संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज पंथ के नेतृत्व में यह आंदोलन लगातार विस्तार ले रहा है। संगठन का कहना है कि निर्दोष पुरुषों, बेटों और भाइयों के खिलाफ झूठे दहेज, तलाक और घरेलू मामलों की शिकायतों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसके कारण कई परिवार मानसिक, सामाजिक और आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
पंकज पंथ ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में अनेक मामले सामने आए हैं, जहां कथित रूप से झूठे मामलों के चलते निर्दोष पुरुषों को लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है। उन्होंने मांग की कि पुरुषों के अधिकारों और न्याय के लिए एक स्वतंत्र पुरुष आयोग का गठन किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि अश्लीलता मुक्त भारत संगठन के साथ-साथ कई अन्य सामाजिक संगठनों ने भी पुरुष आयोग की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। खास बात यह है कि इस मांग को लेकर कुछ महिला संगठनों ने भी समर्थन दिया है।
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से सुशीला खत्री, राष्ट्रीय अध्यक्ष, ऑल इंडिया आंगनबाड़ी एम्प्लाइज फेडरेशन, ने भी पुरुष आयोग की मांग को उचित बताते हुए इसका समर्थन किया है। उनका कहना है कि न्याय व्यवस्था में संतुलन बनाए रखने के लिए सभी पक्षों की सुनवाई जरूरी है।
वहीं अल्मोड़ा से सामाजिक कार्यकर्ता प्रताप सिंह नेगी ने भी पुरुष आयोग की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और पुरुष आयोग से संबंधित विधेयक संसद में पेश करना चाहिए, ताकि निर्दोष पुरुषों को भी अपनी बात रखने और न्याय पाने का अवसर मिल सके।
आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि जब तक पुरुष आयोग का गठन नहीं होता, तब तक यह अभियान देशभर में जारी रहेगा।

वहीं अल्मोड़ा से सामाजिक कार्यकर्ता प्रताप सिंह नेगी ने भी पुरुष आयोग की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और पुरुष आयोग से संबंधित विधेयक संसद में पेश करना चाहिए, ताकि निर्दोष पुरुषों को भी अपनी बात रखने और न्याय पाने का अवसर मिल सके।