उत्तराखंड में पेंशन घोटाले की परतें खुलीं! 1377 सेवानिवृत्त कर्मचारी ले रहे थे दोहरी पेंशन, कैग की रिपोर्ट से हड़कंप
देहरादून। उत्तराखंड में पेंशन व्यवस्था को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों से सेवानिवृत्त हो चुके 1377 कर्मचारी नियमों को दरकिनार कर दोहरी पेंशन का लाभ उठा रहे थे। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की डेटा एनालिसिस और क्रॉस वेरिफिकेशन प्रक्रिया में यह चौंकाने वाला मामला सामने आया है।
कैग द्वारा समाज कल्याण विभाग के माध्यम से दी जा रही वृद्धा और विधवा पेंशन तथा सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली सेवानिवृत्ति पेंशन के आंकड़ों का मिलान किया गया। आधार नंबर से डाटा का सत्यापन करने पर सामने आया कि सैकड़ों पूर्व कर्मचारी सरकारी पेंशन के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा पेंशन भी ले रहे थे, जो नियमों का खुला उल्लंघन है।
🔍 आधार से खुली पोल
जांच में स्पष्ट हुआ कि ये पूर्व कर्मचारी न केवल नियमित पेंशन प्राप्त कर रहे थे, बल्कि वृद्धा और विधवा पेंशन जैसी योजनाओं का भी लाभ उठा रहे थे, जो केवल आर्थिक रूप से निर्बल वर्ग के लिए निर्धारित हैं।
📨 15 दिन में रिपोर्ट तलब
कैग ने इस गंभीर मामले को लेकर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन और वित्त विभाग को पत्र भेजते हुए 15 दिन के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। नियमानुसार, कोई भी सेवानिवृत्त कर्मचारी एक से अधिक पेंशन योजनाओं का लाभ नहीं ले सकता।
⚠️ प्रशासनिक हलचल तेज
हालांकि समाज कल्याण विभाग के निदेशक संदीप तिवारी का कहना है कि फिलहाल यह मामला विभाग के संज्ञान में नहीं आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कैग या शासन से निर्देश मिलते ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
❓ बड़ा सवाल
आखिर इतने वर्षों तक यह दोहरी पेंशन कैसे चलती रही?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी होगी जांच?
क्या होगी रिकवरी और कानूनी कार्रवाई?
उत्तराखंड में सामने आया यह मामला सरकारी सिस्टम की निगरानी पर बड़ा सवाल खड़ा करता है और आने वाले दिनों में इस पर सियासी व प्रशासनिक हलचल और तेज होने की संभावना है।

