नशा मुक्ति केंद्र में बड़ा खेल बेनकाब!
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नशा मुक्ति केंद्र में बड़ा खेल बेनकाब! औचक निरीक्षण में खुली पोल – लाइसेंस निरस्त करने के आदेश, मरीजों से वसूली का खुलासा

हीरानगर स्थित निर्वाण नशा उन्मूलन एवं पुनर्वास केंद्र में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया जब आयुक्त/सचिव मुख्यमंत्री दीपक रावत ने अचानक औचक निरीक्षण कर डाला। निरीक्षण के दौरान जो खुलासे हुए, उन्होंने प्रशासन को भी चौंका दिया। भारी अनियमितताएं सामने आने पर आयुक्त ने मौके पर ही केंद्र का लाइसेंस निरस्त करने के निर्देश एसीएमओ को दे दिए।

गाइडलाइन के अनुसार केवल नशे के आदी मरीजों को ही नशा मुक्ति केंद्र में रखा जा सकता है, लेकिन निरीक्षण में सामने आया कि अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों को भी जबरन केंद्र में भर्ती किया गया। इसे आयुक्त ने “घोर अपराध” करार दिया।

केंद्र को केवल पुरुष मरीजों के लिए स्वीकृति मिली थी, लेकिन निरीक्षण में महिला मरीजों को भी रखा जाना पाया गया। इस पर आयुक्त ने कड़ी नाराजगी जताते हुए सख्त कार्रवाई और स्पष्टीकरण के निर्देश दिए।

केंद्र सरकार की ओर से 30 मरीजों के निशुल्क इलाज के लिए हर माह बजट जारी होता है। इसके बावजूद मरीजों से धनराशि वसूली जा रही थी। हैरानी की बात यह कि वसूली का कोई रिकॉर्ड या दस्तावेज उपलब्ध नहीं था। आयुक्त ने गुरुवार सुबह 11 बजे तक सभी दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

शासन स्तर से केवल 30 मरीजों के इलाज की अनुमति है, लेकिन पंजिका में 30 से अधिक मरीजों का उपचार किया जाना पाया गया। कई मरीजों के नाम रजिस्टर में दर्ज ही नहीं थे।

आयुक्त ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए 15 दिनों का सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं और चिकित्सा विभाग को क्षेत्र के सभी नशा मुक्ति केंद्रों की नियमित जांच करने को कहा है।

नियमों के अनुसार केंद्र में मानसिक चिकित्सक, फिजिशियन और मेडिकल ऑफिसर की तैनाती अनिवार्य है। लेकिन यहां केवल एक मानसिक चिकित्सक तैनात था, वह भी नियमित नहीं आता था। चौंकाने वाली बात यह रही कि मरीजों को दवाइयां कर्मचारियों द्वारा लिखी जा रही थीं।

निरीक्षण में कई मरीजों के आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य मूल दस्तावेज केंद्र में रखे मिले। आयुक्त ने इसे गंभीर कानूनी अपराध बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज की। हाल ही में भर्ती की गई एक महिला, जो नशे की आदी भी नहीं थी, उसका कोई रिकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज नहीं मिला। इस पर आयुक्त ने तीखी नाराजगी व्यक्त की।


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