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राज्य बजट पर पी.सी. तिवारी का हमला, बोले—रोजगार, पलायन और पहाड़ों के विकास पर सरकार मौन

अल्मोड़ा। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पी.सी. तिवारी ने राज्य सरकार द्वारा पेश किए गए बजट पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह बजट प्रदेश की वास्तविक समस्याओं का समाधान करने के बजाय केवल घोषणाओं और आंकड़ों तक सीमित नजर आता है।

पी.सी. तिवारी ने कहा कि बजट में बढ़ती महंगाई से जूझ रहे मध्यम वर्ग को कोई राहत नहीं दी गई है, वहीं बेरोजगारी, पलायन और पहाड़ों के विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी सरकार का रुख स्पष्ट नहीं दिखाई देता।

उन्होंने कहा कि राज्य पर लगातार बढ़ता कर्ज भी चिंता का विषय है। अनुमान है कि प्रदेश पर कुल कर्ज करीब 90 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच सकता है। ऐसे में बजट का बड़ा हिस्सा केवल ब्याज चुकाने में खर्च होगा, जिससे विकास कार्यों के लिए संसाधन सीमित रह जाएंगे।

तिवारी ने कहा कि सरकार संतुलित विकास की बात तो करती है, लेकिन मैदानी क्षेत्रों की तुलना में पहाड़ी जिलों में बजट का असर कम दिखाई देता है। योजनाएं और आवंटन कागजों में तो दिखते हैं, लेकिन गांवों और कस्बों में उनके परिणाम नजर नहीं आते।

उन्होंने कहा कि बजट में मध्यम वर्ग के लिए किसी प्रकार की सीधी राहत नहीं दी गई है। आवास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में भी सरकार की ओर से कोई बड़ी और प्रभावी योजना सामने नहीं आई है।

तिवारी ने कहा कि सरकार रिवर्स माइग्रेशन और ‘केदार’ योजना जैसी घोषणाएं तो करती है, लेकिन पहाड़ों के खाली होते गांवों में स्वरोजगार और स्थानीय रोजगार के लिए कोई ठोस आर्थिक प्रोत्साहन नहीं दिया गया है।

उन्होंने कहा कि बजट में कौशल विकास की बातें जरूर की गई हैं, लेकिन शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों और बड़े निजी निवेश को लेकर कोई स्पष्ट और समयबद्ध रोडमैप नहीं है।

पी.सी. तिवारी ने कहा कि हिमालयी राज्य होने के बावजूद बजट में जलवायु परिवर्तन, पारिस्थितिकी संरक्षण और आपदा प्रबंधन के लिए कोई विशेष दीर्घकालिक योजना या ग्रीन फाइनेंसिंग का प्रावधान नजर नहीं आता, जो भविष्य के लिए चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि पहाड़ों में फल और सब्जियों के लिए कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट्स की भारी कमी है, जिसके कारण लगभग 40 प्रतिशत तक फसल खराब हो जाती है, लेकिन बजट में इस समस्या के समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं दिखाई देती।

साथ ही उन्होंने कहा कि माध्यमिक शिक्षा की तुलना में उच्च शिक्षा के लिए बजट बहुत कम है, जबकि प्रदेश के कई कॉलेजों की स्थिति सुधारने के लिए अधिक संसाधनों की जरूरत है।

सामाजिक न्याय के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि SC, ST और OBC छात्रों की छात्रवृत्ति तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं के बजट में पिछले वर्षों की तुलना में आनुपातिक कटौती चिंता का विषय है।

अंत में पी.सी. तिवारी ने कहा कि यह बजट प्रदेश की रोजगार, पलायन, कृषि, शिक्षा और पर्यावरण जैसी मूल चुनौतियों का समाधान करने में असफल रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को रोजगार आधारित, पर्यावरण-संवेदनशील और संतुलित विकास की वैकल्पिक आर्थिक नीति की जरूरत है।

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