देहरादून के एकता विहार में रोजगार नीति कानून की मांग को लेकर सत्याग्रह पर बैठे गैरसैंण समिति के युवा और आंदोलनकारी
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देहरादून में युवाओं का महा-सत्याग्रह: “काम नहीं तो वोट नहीं, जॉब चाहिए जुमला नहीं”; गैरसैंण समिति ने की ‘रोजगार नीति कानून’ बनाने की मांग

देहरादून: उत्तराखंड में बढ़ती बेरोजगारी और पलायन के मुद्दे पर प्रदेश का युवा अब आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गया है। ‘स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति’ के तत्वावधान में आज राजधानी देहरादून के एकता विहार में “रोजगार आंदोलन – सत्याग्रह” का आयोजन किया गया। इस सत्याग्रह में प्रदेशभर से आए भारी संख्या में बेरोजगार युवाओं, छात्र नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लेकर उत्तराखंड सरकार के खिलाफ हुंकार भरी। आंदोलनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि सरकार ने रोजगार पर कोई ठोस नीति नहीं बनाई, तो पूरे राज्य में उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।

सत्याग्रह के दौरान डी.ए.वी. पीजी कॉलेज के पूर्व छात्र संघ महासचिव सचिन थपलियाल ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूरे होने के बाद भी यहाँ का पढ़ा-लिखा युवा रोजगार के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।

युवाओं ने सरकार के सामने प्रमुख रूप से ‘उत्तराखंड रोजगार नीति कानून’ बनाने की पुरजोर मांग रखी। इस कानून के तहत सरकार से अगले पांच वर्षों का पूरा भर्ती और रोजगार कैलेंडर जारी करने की मांग की गई है, ताकि युवाओं का भविष्य अंधकार में न लटके। थपलियाल ने चेताया कि यदि सरकार ने इन मांगों पर जल्द कोई गंभीरता नहीं दिखाई, तो युवा एक बार फिर सड़कों पर उतरकर चक्का जाम करने के लिए बाध्य होंगे।

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आंदोलन स्थल पर युवाओं का आक्रोश साफ देखने को मिला। सत्याग्रह के दौरान युवाओं ने “काम नहीं तो वोट नहीं” और “जॉब चाहिए जुमला नहीं” जैसे तीखे नारे बुलंद किए।

मंच से बोलते हुए वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से हो रहे भयानक पलायन को रोकने और युवाओं के सुरक्षित भविष्य के लिए एक सुदृढ़ रोजगार नीति कानून वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है। कार्यक्रम के समापन पर युवाओं ने पारंपरिक और जनगीत गाकर स्थायी राजधानी गैरसैंण के संकल्प को दोहराया और राज्य में ही रोजगार सुरक्षित करने की हुंकार भरी।

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युवाओं के इस रोजगार आंदोलन को समाज के प्रबुद्ध वर्ग का भी बड़ा समर्थन मिल रहा है। इस सत्याग्रह में पूर्व आई.ए.एस. अधिकारी विनोद प्रसाद रतूड़ी, सत्य प्रकाश कोटियाल, आनंद राम, अजय नौटियाल और अनूप सिंह सहित कई वरिष्ठ आंदोलनकारी व सामाजिक कार्यकर्ता मुख्य रूप से उपस्थित रहे। सभी ने एक सुर में युवाओं की मांगों को जायज ठहराते हुए सरकार से इस पर तुरंत कैबिनेट में ठोस फैसला लेने का आग्रह किया।


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