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सौरभ जोशी के व्लॉग में दिखे सुशील भट्ट अब शहरभर में चर्चा का विषय बने ।

हल्द्वानी। देश के लोकप्रिय यूट्यूबर सौरभ जोशी के व्लॉग में नजर आने के बाद हल्द्वानी के प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता एवं राजनीतिज्ञ सुशील भट्ट इन दिनों खास चर्चा में हैं। व्लॉग में उनकी उपस्थिति के बाद सोशल मीडिया से लेकर आम जनमानस तक उनके बारे में उत्सुकता बढ़ गई है। सुशील भट्ट को लेकर लोगों के बीच उत्सुकता काफी बढ़ गई है और उनकी लोकप्रियता में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है ।
दिलचस्प बात यह है कि यह चर्चा भी जोरों पर है कि सुशील भट्ट सौरभ जोशी के पिता हरीश जोशी के समधी बनने जा रहे हैं। इस चर्चा ने लोगों के बीच सुशील भट्ट को लेकर काफी उत्सुकता बढ़ा दी है।
स्थिति यह है कि सुशील भट्ट जब भी घर से बाहर निकलते हैं तो कई लोग उन्हें पहचानकर कहते हैं—”अरे, ये तो वही हैं जो सौरभ जोशी के व्लॉग में आए थे!” वहीं अनेक मित्र और शुभचिंतक उन्हें बधाइयाँ देते हुए मजाकिया अंदाज में बिटिया की शादी का निमंत्रण पत्र तक मांग रहे हैं।

व्लॉग से बढ़ी पहचान

स्थानीय लोगों का कहना है कि सौरभ जोशी के करोड़ों दर्शकों वाले व्लॉग में दिखाई देने के बाद सुशील भट्ट की पहचान और लोकप्रियता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सोशल मीडिया पर भी लोग उनके बारे में जानकारी खोज रहे हैं और उन्हें शुभकामनाएं दे रहे हैं। कुल मिलाकर, एक व्लॉग नें सुशील भट्ट को एक बार फिर जनचर्चा के केंद्र में ला दिया है।

कौन हैं सुशील भट्ट?

सुशील भट्ट लंबे समय से सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। उनका सार्वजनिक जीवन संघर्ष, जनआंदोलनों और सामाजिक सरोकारों से जुड़ा रहा है।

सुशील भट्ट का राजनीतिक सफर
2007 – हल्द्वानी विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़कर राजनीतिक जीवन की दमदार शुरुआत।
2008 – नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के विचारों से प्रेरित होकर स्वराज हिंद फौज की स्थापना।
2009 – भ्रष्टाचार, आतंकवाद, गरीबी और बेरोजगारी के खिलाफ भारत परिवर्तन यात्रा (हल्द्वानी से दिल्ली) का नेतृत्व।
2010 – भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।
2015 – भाजपा में लोकतंत्र और कार्यकर्ता सम्मान की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर आंदोलन; दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तारी।
2018 – समाजसेवी अन्ना हजारे की राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्य नियुक्त।
2018 – हल्द्वानी में अन्ना हजारे की विशाल जनसभा के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका।
2018 – लोकपाल, चुनाव सुधार और किसान हितों की मांगों को लेकर अन्ना हजारे के दिल्ली सत्याग्रह में सक्रिय सहभागिता।


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