सोना चांदी भाव
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5 महीने में चांदी 1.77 लाख और सोना 37 हजार तक टूटा, निवेशकों के फंसे करोड़ों रुपये! 👇

Devbhoomijanhunkar: अमेरिका और ईरान के बीच गहराते भू-राजनैतिक तनाव (Geopolitical Tension) का सीधा और भयानक असर अब भारतीय सराफा बाजार पर दिखाई दे रहा है। जनवरी 2026 में अपने ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर को छूने के बाद से मूल्यवान धातुओं—सोना और चांदी—में भारी गिरावट का दौर शुरू हुआ है, जो थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले साढ़े पांच महीनों के भीतर ही चांदी लगभग 1.77 लाख रुपये प्रति किलो और सोना करीब 37,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है। इस तूफानी गिरावट से जहां स्थानीय सराफा बाजार का कामकाज पूरी तरह ठप पड़ गया है, वहीं ऊंचे भाव पर निवेश करने वालों की सांसें अटकी हुई हैं।

औंधे मुंह गिरे भाव: जनवरी के रिकॉर्ड स्तर से भारी गिरावट

जनवरी 2026 में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में सोने-चांदी ने ऐतिहासिक छलांग लगाई थी। उस समय चांदी ने करीब 4 लाख रुपये प्रति किलो और सोने ने 1.82 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का जादुई स्तर छुआ था। लेकिन इसके बाद से बाजार में लगातार अस्थिरता और गिरावट हावी है।

अगर वर्तमान भाव की तुलना जनवरी के उस रिकॉर्ड स्तर से की जाए, तो चांदी में करीब 1.77 लाख रुपये प्रति किलो और सोने में 37 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम की बड़ी विधिक गिरावट दर्ज की जा चुकी है। हर दिन तेजी से बदलते भाव के कारण स्थानीय सराफा बाजार की चाल पूरी तरह बेपटरी हो गई है।

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बाजार का ताजा हाल (बुधवार के भाव):

मंगलवार शाम को अंतरराष्ट्रीय बाजार में हल्की तेजी के कारण निवेशकों ने थोड़ी राहत महसूस की थी, लेकिन बुधवार को भाव फिर से नीचे लुढ़क गए:

  • MCX (मशीन) पर भाव: चांदी 2,20,449 से 2,23,120 रुपये प्रति किलो और सोना 1,40,740 से 1,41,788 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच कारोबार करता दिखा।

  • स्थानीय हाजिर बाजार: चांदी 2,23,000 रुपये प्रति किलो और सोना 1,41,300 रुपये प्रति 10 ग्राम बिका।

  • RTGS (बिल) भाव: चांदी 2,24,100 रुपये प्रति किलो और सोना 1,45,300 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया।

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निवेशकों में हाहाकार, सराफा बाजार में ‘कैश क्रंच’ (नकद संकट)

इस अप्रत्याशित और तूफानी गिरावट ने उन निवेशकों की रातों की नींद उड़ा दी है, जिन्होंने तेजी के दौर में ऊंचे भाव पर बड़ी मात्रा में सोने-चांदी की विधिक खरीद की थी। सराफा व्यवसायियों का कहना है कि वर्तमान में बाजार पूरी तरह ठप है। न तो नई ग्राहक खरीदी निकल रही है और न ही लोग बिकवाली (Selling) कर रहे हैं। व्यापारी हाथ पर हाथ धरकर बैठे हैं।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि बाजार में ‘नकदी का संकट’ (Cash Crunch) खड़ा हो गया है। ऊंचे भाव में खरीदी करने वालों के लाखों-करोड़ों रुपये बाजार में फंस गए हैं और वे आगे की रणनीति तय नहीं कर पा रहे हैं। घबराहट में कई निवेशकों ने तो फिलहाल सर्राफा बाजार से दूरी ही बना ली है।

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क्या यह नई खरीदी का सही समय है? क्या कहते हैं जानकार…

हालांकि, एक तरफ जहां निवेशकों में हड़कंप है, वहीं दूसरी तरफ कुछ सराफा कारोबारी इस गिरावट को एक ‘बेहतरीन अवसर’ (Golden Opportunity) बता रहे हैं। उनका मानना है कि साढ़े पांच माह में आई इस बड़ी गिरावट के कारण निचले स्तर (Lower Level) पर निवेश करने वालों के लिए यह एक अच्छा मौका हो सकता है।

जानकारों के अनुसार, सोना-चांदी की आगे की चाल पूरी तरह से वैश्विक घटनाक्रम, अमेरिका-ईरान तनाव और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है और निवेशकों में ‘सुरक्षित निवेश’ (Safe Haven) की मांग लौटती है, तो भाव को फिर से सहारा मिल सकता है। लेकिन अगर बिकवाली का यह दबाव जारी रहा, तो गिरावट लंबी खिंच सकती है, जो स्थानीय कारोबार के लिए बेहद चिंताजनक होगा। फिलहाल, बाजार की दिशा को लेकर पूरी तरह असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

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