Massive Crowd Of Women And Villagers In Bindukhatta Marching For Revenue Village Status Padyatraबिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की मांग को लेकर 7वें दिन पदयात्रा में शामिल सैकड़ों महिलाएं एवं ग्रामीण।
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देवभूमि जन हुंकार, बिंदुखत्ता (लालकुआं – नैनीताल): नैनीताल जनपद अंतर्गत लालकुआं विधानसभा क्षेत्र के बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाने और स्थानीय निवासियों को भूमि का स्थायी मालिकाना हक दिलाने की मांग को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन दिन-प्रतिदिन अधिक व्यापक और आक्रामक होता जा रहा है। घर-घर जनसंपर्क और जनजागरण अभियान के तहत निकाली जा रही पदयात्रा के सातवें दिन सैकड़ों महिलाओं की ऐतिहासिक और सशक्त भागीदारी ने आंदोलन में नई ऊर्जा और उत्साह भर दिया।

सरस्वती मंदिर काररोड से प्राचीन शिव मंदिर राजीवनगर तक पदयात्रा

भीषण गर्मी और तेज धूप की परवाह किए बिना महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों, पूर्व सैनिकों और पुरुषों ने भारी संख्या में पदयात्रा में शामिल होकर राजस्व ग्राम की मांग को पूरी बुलंदी के साथ उठाया।

पदयात्रा का शुभारंभ सरस्वती माता मंदिर, प्राथमिक पाठशाला काररोड से हुआ। इसके बाद पदयात्रा मुख्य बाजार, बोरा लाइन, बोरिंग पट्टा और राजीवनगर होते हुए प्राचीन शिव मंदिर, राजीवनगर काररोड पहुंची, जहां एक विशाल जनसभा के साथ इसका समापन हुआ। पदयात्रा मार्ग पर जगह-जगह स्थानीय नागरिकों ने पदयात्रियों का आत्मीय स्वागत किया और आंदोलन के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता व्यक्त की।

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गगनभेदी नारों और जनगीतों से गूंज उठी सड़कें

पदयात्रा के दौरान पूरा क्षेत्र इन नारों से गुंजायमान रहा:

  • “बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाना होगा!”

  • “हम अपना अधिकार मांगते, नहीं किसी से भीख मांगते!”

  • “बिंदुखत्ता मांगे राजस्व ग्राम!”

पदयात्रा में शामिल आंदोलनकारियों ने पारंपरिक और जनचेतना के गीतों के माध्यम से जन-जन को जोड़ा। साथ ही वनाधिकार अधिनियम (Forest Rights Act) तथा राजस्व ग्राम बनने के उपरांत ग्रामीणों को मिलने वाले बुनियादी, विधिक एवं विकासात्मक अधिकारों के प्रति लोगों को विस्तार से जागरूक किया गया।

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“लोकतांत्रिक तरीके से मंजिल तक पहुंचेगा संघर्ष”

आंदोलनकारी नेताओं ने संबोधित करते हुए कहा कि बिंदुखत्ता की जनता अब अपने संवैधानिक अधिकारों को लेकर पूरी तरह जागरूक और एकजुट हो चुकी है। ग्रामीणों का यह आंदोलन अब केवल कुछ संगठनों या व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर घर और परिवार की साझी लड़ाई बन चुका है। आंदोलनकारियों ने शासन-प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया कि ग्रामीण पूरी तरह शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से राजस्व ग्राम का दर्जा हासिल करने के लिए संघर्ष को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाने के लिए संकल्पबद्ध हैं।

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सातवें दिन की इस विशाल पदयात्रा में वनाधिकार संगठन अध्यक्ष उमेश चंद्र भट्ट, समिति अध्यक्ष अर्जुन नाथ गोस्वामी, पूर्व सैनिक संगठन अध्यक्ष खिलाफ सिंह दानू, कैप्टन चंचल सिंह कोरंगा, संयोजक भरत नेगी, सचिव एडवोकेट बलवंत बिष्ट, नंदन बोरा, कविराज धामी, दीपक नेगी, दीपक रौतेला, भूपेश जोशी, कुंवर सिंह पवार, दीपक पाठक, प्रकाश उत्तराखंडी, नंदन जग्गी, गोपाल नेगी, ममता बिष्ट, मोहिनी मेहता, संध्या डालाकोटी, चेतना गुरुरानी, माधवी भट्ट, मीना नेगी, रेवती भट्ट, इंदु बोरा, नंदी बिष्ट, आनंदी बोरा, दमयंती कार्की, जेसी उप्रेती, देवराज दानू, फकीर सिंह, मुन्ना बोरा, सोबन सिंह बोरा, विनोद गुरुरानी, हरीश रौतेला, मनोज बसनायत, पुष्कर दानू, एडवोकेट किशन पांडे, मोहन बिसौती, पूरन बिष्ट, सागर बोरा, पूरन सिंह गड़िया, रोहित तिवारी, पंकज जोशी, कुंवर सिंह गुसाईं, मनोज रावत, बिशन दत्त तिवारी एवं पूरन बोरा समेत सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।


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