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देवभूमि जन हुंकार, हल्द्वानी (नैनीताल – 21 अगस्त 2026): संदिग्ध अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी सेवा में नियुक्ति पाने के बहुचर्चित मामले में जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल ने विधिक व्यवस्थाओं के तहत बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। सितारगंज निवासी अनिल कुमार कंबोज की शिकायत पर गठित जिला स्तरीय स्क्रूटनी कमेटी की विस्तृत जांच आख्या और संस्तुति के आधार पर होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डॉ. मनीषा कायथ का हल्द्वानी तहसील से जारी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।

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जांच में खुला हिमाचल से उत्तराखंड का कनेक्शन

प्रशासनिक जांच में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि डॉ. मनीषा कायथ का मूल निवास हिमाचल प्रदेश के जनपद सोलन में है। तहसीलदार कसौली (हिमाचल प्रदेश) द्वारा 11 अक्टूबर 1999 को उन्हें हिमाचल प्रदेश की ‘छिब्बे’ जाति का अनुसूचित जाति (SC) प्रमाण पत्र निर्गत किया गया था।

विवाह के उपरांत उन्होंने हल्द्वानी तहसील से 22 जनवरी 2014 को उत्तराखंड की ‘धोबी’ जाति का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र (संख्या 040201400069/266) हासिल कर लिया। इसी प्रमाण पत्र के आधार पर उनका चयन उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी के पद पर हुआ। वर्तमान में डॉ. कायथ चंपावत जनपद के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) पाटी में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संविदा पर सेवाएं दे रही हैं।

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03 अगस्त को स्क्रूटनी कमेटी ने परखी न्यायिक व्यवस्थाएं

प्रकरण की निष्पक्ष सुनवाई एवं गहन परीक्षण हेतु 03 अगस्त 2026 को जिला स्तरीय स्क्रूटनी कमेटी की बैठक आयोजित की गई थी। इस उच्चस्तरीय बैठक में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), नगर मजिस्ट्रेट हल्द्वानी, जिला समाज कल्याण अधिकारी नैनीताल तथा जिला होम्योपैथिक अधिकारी चंपावत ने अभिलेखों की बिंदुवार समीक्षा की।

कमेटी ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित विधि Ranjana Kumari Vs State of Uttaranchal (2013) तथा उत्तराखंड उच्च न्यायालय के Smt. Anshu Sagar Vs State of Uttarakhand (2025) में दिए गए ऐतिहासिक निर्णयों का बारीकी से परीक्षण किया। इन न्यायिक व्यवस्थाओं में स्पष्ट रूप से प्रतिपादित किया गया है कि:

“अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ केवल अपने मूल राज्य से संबंधित होने के आधार पर ही उस राज्य की सेवाओं में अनुमन्य है। विवाह के पश्चात किसी अन्य राज्य में माइग्रेशन (प्रवासन) के आधार पर संबंधित महिला उस राज्य की सेवाओं में अनुसूचित जाति आरक्षण का दावा नहीं कर सकती।”

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 प्रमाण पत्र जब्ती के निर्देश, विभागों को भेजा गया पत्र

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने जिला स्तरीय स्क्रूटनी कमेटी की संस्तुति और शीर्ष न्यायालय के दिशा-निर्देशों के आधार पर हल्द्वानी तहसील से जारी जाति प्रमाण पत्र को तत्काल निरस्त घोषित कर दिया है। इसके साथ ही तहसीलदार हल्द्वानी को उक्त प्रमाण पत्र को अविलंब जब्त करने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्रकरण के निस्तारण के उपरांत अग्रिम विभागीय व विधिक कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों एवं चंपावत प्रशासन को आवश्यक पत्राचार कर दिया गया है।

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने दोटूक कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य प्रत्येक प्रकरण में शत-प्रतिशत निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखते हुए प्रचलित विधि सम्मत नियमों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराना है।


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