देवभूमि जन हुंकार, देहरादून / रानीपोखरी: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से साइबर अपराध का एक बेहद शातिर, डरावना और सनसनीखेज मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) के नए और खतरनाक हथकंडे का इस्तेमाल करते हुए एक बुजुर्ग को देशद्रोह के झूठे मामलों में फंसाने का खौफ दिखाया और उनसे 27.60 लाख रुपये की भारी-भरकम रकम ऐंठ ली। गनीमत यह रही कि बैंक कर्मचारियों की सूझबूझ और सतर्कता के चलते 10 लाख रुपये की अतिरिक्त ठगी होने से बाल-बाल बच गई। पीड़ित की तहरीर पर साइबर अपराध थाना देहरादून में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है, और एसटीएफ इसकी गहनता से जांच कर रही है।
व्हाट्सऐप वीडियो कॉल और ‘नासिक पुलिस’ का फर्जी ड्रामा
साइबर ठगी की यह खौफनाक वारदात बीते 5 सितंबर को शुरू हुई थी। रानीपोखरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत बड़कोट माफी निवासी बुजुर्ग रमेश चंद्र खंडूड़ी के मोबाइल फोन पर व्हाट्सऐप पर एक अनजान वीडियो कॉल आई।
कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को महाराष्ट्र के नासिक का पुलिस अफसर ‘संजय’ बताया। उसने बुजुर्ग पर अत्यंत गंभीर आरोप मढ़ते हुए कहा कि उनके केनरा बैंक के खाते से गैरकानूनी रूप से दो करोड़ रुपये का संदिग्ध लेन-देन हुआ है, और इस मामले में उन पर देशद्रोह का गंभीर मुकदमा चलाया जा रहा है।
फर्जी ईडी वारंट और पुलिस स्टेशन जैसा खौफनाक सेटअप
बुजुर्ग को मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ने और डराने के लिए ठगों ने व्हाट्सऐप पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) का एक फर्जी गिरफ्तारी वारंट भी भेज दिया।
वीडियो कॉल के दौरान आरोपी ने पुलिस कमिश्नर की वर्दी पहन रखी थी, और उसके पीछे दीवार पर नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) का चिह्न व अशोक चक्र भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था। पूरा माहौल किसी असली और हाई-प्रोफाइल पुलिस स्टेशन जैसा प्रतीत हो रहा था। ठगों ने बुजुर्ग को यह शातिर झांसा दिया कि जब तक उनके सभी बैंक खातों का लीगल सत्यापन पूरा नहीं हो जाता, तब तक उनका सारा पैसा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के एक ‘स्पेशल अकाउंट’ में सुरक्षित जमा रहेगा, जो जांच पूरी होने के बाद ब्याज सहित वापस लौटा दिया जाएगा।
खौफ के साए में दो किस्तों में ट्रांसफर किए 27.60 लाख रुपये
ठगों द्वारा बुने गए इस जाल और मानसिक दबाव के आगे बुजुर्ग पूरी तरह घबरा गए। डर के साए में आकर उन्होंने ठगों के कहे अनुसार बैंक से पैसे ट्रांसफर करना शुरू कर दिया:
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10 सितंबर को: 6.10 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए।
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16 सितंबर को: 21.50 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए।
इस प्रकार साइबर ठगों ने कुल 27.60 लाख रुपये की बड़ी चपत लगा दी।
बैंक कर्मियों की सतर्कता से बचा अतिरिक्त नुकसान
यह सिलसिला यहीं नहीं थमा। दिनांक 24 सितंबर को शातिर ठगों ने बुजुर्ग पर दबाव बनाते हुए 10 लाख रुपये और जमा करने को कहा।
जब पीड़ित बुजुर्ग इस भारी-भरकम रकम को ट्रांसफर करवाने के लिए बैंक पहुँचे, तो वहां के बैंक कर्मचारियों को पूरी प्रक्रिया पर गंभीर शक हुआ। बैंककर्मियों ने तुरंत सूझबूझ और सतर्कता का परिचय देते हुए पैसे ट्रांसफर होने से रोक दिए और तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी। बैंक कर्मचारियों की इस सजगता के कारण 10 लाख रुपये लुटने से बच गए।
इसके बाद जब बुजुर्ग को अहसास हुआ कि उनके साथ बहुत बड़ा साइबर फ्रॉड हो चुका है, तो उन्होंने होश संभालते हुए साइबर अपराध थाना देहरादून में इसकी आधिकारिक तहरीर दी।
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इस गंभीर मामले में साइबर थाने में सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। तकनीकी सर्विलांस और बैंक खातों के ट्रेल के आधार पर आरोपियों की लोकेशन ट्रेस कर उनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें दबिश दे रही हैं।
पुलिस ने एक बार फिर आम जनता से अपील की है कि कोई भी जांच एजेंसी या पुलिस वीडियो कॉल पर कभी भी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है और न ही पैसे ट्रांसफर करने को कहती है। ऐसे किसी भी फ्रॉड से सावधान रहें।
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