देवभूमि जन हुंकार, रामनगर / नैनीताल / हल्द्वानी: उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के अंतर्गत आने वाले रामनगर नगर पालिका परिषद के कार्यों, दावों और प्रशासनिक व्यवस्था की पोल अब खुलने लगी है। कुमाऊँ कमिश्नर दीपक रावत द्वारा दिए गए सख्त निर्देशों के क्रम में जिला प्रशासन ने कड़ा कदम उठाते हुए नगर पालिका के विभिन्न क्रियाकलापों की उच्चस्तरीय जाँच शुरू कर दी है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने मामले की वास्तविकता का पता लगाने के लिए उपजिलाधिकारी रामनगर की अध्यक्षता में एक जाँच समिति का गठन कर दिया है, जिसे 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।
प्लास्टिक प्लांट के इस्तेमाल के दावे पर उठे सवाल
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि नगर पालिका परिषद, रामनगर द्वारा यह दावा किया गया था कि उनके द्वारा कूड़ा एवं सिंगल यूज़ प्लास्टिक के निस्तारण के लिए हल्द्वानी स्थित झील विकास प्राधिकरण के प्लास्टिक प्लांट का उपयोग किया जा रहा है।
लेकिन प्रशासनिक संज्ञान में यह बात आई कि उक्त प्लांट वर्तमान में क्रियाशील (Operational) ही नहीं है। इस प्रकरण की वास्तविक स्थिति तथा इसके पर्यावरणीय एवं जनस्वास्थ्य संबंधी प्रभावों का गहन परीक्षण किया जाना बेहद आवश्यक था। इसी को ध्यान में रखते हुए डीएम ने उपजिलाधिकारी रामनगर और उप कोषाधिकारी को शामिल करते हुए जाँच समिति बनाई है।
किन-किन प्रमुख बिंदुओं पर होगी जाँच?
गठित की गई यह उच्चस्तरीय जाँच समिति मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर अभिलेखीय (Documentary) और स्थलीय (Ground) परीक्षण करेगी:
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प्लास्टिक व कूड़ा निस्तारण: नगर पालिका परिषद्, रामनगर द्वारा वर्तमान में कूड़े व सिंगल यूज़ प्लास्टिक का निस्तारण वास्तव में कहाँ और किस प्रकार किया जा रहा है।
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केमिकल और स्टॉक रजिस्टर: ब्लीचिंग पाउडर, डी.बी.टी. (DBT) और अन्य आवश्यक रसायनों के चालू वित्तीय वर्ष के स्टॉक, क्रय तथा स्टॉक रजिस्टर में की गई विधिवत प्रविष्टियों की वास्तविक स्थिति।
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बायोमेट्रिक उपस्थिति (Biometric Attendance): नगर पालिका परिषद् के कार्मिकों और पर्यावरण मित्रों की शासन द्वारा निर्धारित एस.ओ.पी. (SOP) के अनुरूप बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज किए जाने की हकीकत।
15 दिन के भीतर सौंपनी होगी तथ्यात्मक आख्या
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जाँच समिति तमाम साक्ष्यों और अभिलेखों का बारीकी से विश्लेषण करते हुए तथ्यात्मक, सुस्पष्ट और बिंदुवार जाँच आख्या तैयार करेगी। इस पूरी प्रक्रिया को पूरा कर 15 दिवस के भीतर अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी कार्यालय में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करना होगा।
प्रशासन के इस सख्त और पारदर्शी रुख से रामनगर नगर पालिका के महकमे में हड़कंप मच गया है, और माना जा रहा है कि रिपोर्ट आने के बाद कई गंभीर खुलासे हो सकते हैं।
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