“17 से 18 करोड़ रुपये के उपयोग पर उठे सवाल”: 15वें वित्त आयोग और विभिन्न योजनाओं की धनराशि की संतोषजनक नहीं पाई गई स्थिति
‘हल्द्वानी स्थित आवास पर रखे गए थे अभियंताओं के 55 सरकारी पत्रावलियां’: नक्शा प्रकरणों में गड़बड़ी मिलने पर जेई सहित तीन कार्मिक अटैच
डिस्पैच रजिस्टर में फर्जीवाड़ा और बिना अनुमति फाइलें बाहर ले जाने पर सीडीओ ने जताई कड़ी नाराजगी, होगी पारदर्शी जांच
देवभूमि जन हुंकार, नैनीताल / हल्द्वानी: उत्तराखंड के नैनीताल जनपद से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली प्रशासनिक खबर सामने आ रही है। जिला पंचायत कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए मुख्य विकास अधिकारी (CDO) अरविंद कुमार पाण्डेय ने कार्यालय का औचक और स्थलीय निरीक्षण किया। इस औचक छापेमारी के दौरान कार्यालय अभिलेखों, विकास योजनाओं, वित्तीय प्रकरणों और नक्शा पास करने की प्रक्रिया में एक के बाद एक कई भारी अनियमितताएं और घोर लापरवाही उजागर हुई हैं, जिससे जिला पंचायत महकमे में हड़कंप मच गया है।
निरीक्षण दल के साथ कार्यालय पहुँचे सीडीओ ने केंद्र पोषित, राज्य पोषित योजनाओं तथा 15वें वित्त आयोग से प्राप्त धनराशि के उपयोग की गहन समीक्षा की। जांच में सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2021-22 से विभिन्न मदों में प्राप्त लगभग 17 से 18 करोड़ रुपये की धनराशि के व्यय और उपयोग की स्थिति बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं है। स्वीकृत योजनाओं के समयबद्ध प्रस्ताव, क्रियान्वयन और नियमों के विरुद्ध उपयोग पर कड़ा रुख अपनाते हुए विस्तृत विवरण तलब किया गया है।
भवन एवं नक्शा पास करने से संबंधित अभिलेखों की जब बारीकी से जांच की गई, तो कई मामलों में आवश्यक तिथियों, हस्ताक्षर, और शुल्क जमा होने संबंधी रसीदों व अभिलेखों में भारी कमियां पाई गईं। इस गंभीर अनियमितता को देखते हुए मुख्य विकास अधिकारी ने नक्शा प्रकरणों की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। जांच प्रक्रिया पूर्ण होने तक कनिष्ठ अभियंता (JE) सहित संबंधित तीन कार्मिकों को जिला पंचायत कार्यालय से अन्य कार्यालय में संबद्ध (अटैच) किए जाने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके लिए जिलाधिकारी महोदय से अनुमति प्राप्त कर अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।
निरीक्षण के दौरान सबसे सनसनीखेज खुलासा तब हुआ जब यह जानकारी सामने आई कि कनिष्ठ एवं वरिष्ठ अभियंताओं से संबंधित लगभग 50 से 55 महत्वपूर्ण शासकीय पत्रावलियां कार्यालय से बाहर हल्द्वानी स्थित निजी आवासों पर रखी गई थीं। बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के शासकीय फाइलों को कार्यालय से बाहर रखना बेहद गंभीर वित्तीय एवं प्रशासनिक अनुशासनहीनता माना गया है।
इसके अलावा, जब टीम निरीक्षण कर रही थी, ठीक उसी समय डिस्पैच रजिस्टर में प्रविष्टियां (एंट्री) किए जाने का मामला भी पकड़ा गया, जिस पर सीडीओ ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए तत्काल जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
जिला पंचायत की कर वसूली (Tax Collection) में भारी कमी, लीज नवीनीकरण (वर्ष 1955-56 से चली आ रही लीज), अवैध निर्माण, और बिना पंजीकरण के संचालित हो रहे होम स्टे के मामलों पर भी शिकंजा कसने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, उपनल के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों की भूमिका और आवश्यकता की भी समीक्षा की जा रही है।
मुख्य विकास अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निरीक्षण में सामने आए सभी बिंदुओं, वित्तीय स्थिति और लंबित प्रकरणों की समग्र रिपोर्ट मात्र दो घंटे के भीतर तैयार कर प्रस्तुत की जाए, जिसे अंतिम अनुमोदन हेतु जिलाधिकारी महोदय को प्रेषित किया जाएगा। सीडीओ ने दो टूक कहा है कि इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाएगी, और जो भी तथ्य या जिम्मेदार व्यक्ति सामने आएंगे, उनके विरुद्ध नियमानुसार सबसे कड़ी अनुशासनात्मक व वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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