Uttarakhand Social Protest Concept Representing Savarn Shakti Organization Satyagraha in Haldwani
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देवभूमि जन हुंकार, हल्द्वानी / नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के अंतर्गत प्रमुख शहर हल्द्वानी में सामाजिक और राजनीतिक पारा उस वक्त चढ़ गया जब तिकोनिया स्थित बुद्ध पार्क में ‘सवर्ण शक्ति संगठन’ के बैनर तले सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए। 2 अक्टूबर (गांधी जयंती व शास्त्री जयंती) के अवसर पर संगठन द्वारा एक दिवसीय सत्याग्रह आंदोलन का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य रूप से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों के खिलाफ जोरदार हुंकार भरी गई।

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कार्यक्रम की शुरुआत बेहद भावुक और देशप्रेम के माहौल में हुई। आज के दिन का स्मरण करते हुए उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान रामपुर तिराहा कांड में शहीद हुए अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके साथ ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उनके चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उनके आदर्शों को याद किया गया। इसके तुरंत बाद कार्यक्रम ने आंदोलनकारी तेवर अख्तियार कर लिए और लोगों ने UGC के नए प्रावधानों के विरोध में आवाज बुलंद करना शुरू कर दिया।

सत्याग्रह को संबोधित करते हुए सवर्ण शक्ति संगठन के अध्यक्ष भुवन भट्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि 2 अक्टूबर का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है जब उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए रामपुर तिराहा में लोगों ने अपना बलिदान दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि आज उत्तराखंड में सबसे बड़ी आबादी सवर्ण समाज की है, इसके बावजूद सरकार यूजीसी जैसे कानून लाकर हमारे साथ भेदभाव कर रही है और लगातार भ्रष्टाचार में लिप्त है।

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संगठन के नेता विशाल शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी जाति के विशेष वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि UGC का नया नियम सवर्ण बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेलने वाला है। यदि कॉलेज और परिसरों में हर छोटी बहस को जातीय भेदभाव बता दिया जाएगा, तो सामान्य वर्ग का छात्र पढ़ाई कैसे कर पाएगा? हम ‘UGC Roll Back’ होने तक चुप बैठने वाले नहीं हैं।

वहीं, तेज सिंह कार्की ने सरकार पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि पूरा उत्तराखंड आज भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। भर्ती घोटालों से लेकर यूजीसी तक हर मोर्चे पर सवर्ण युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है। रामपुर तिराहा के शहीदों ने जिस उन्नत उत्तराखंड का सपना देखा था, यह वह उत्तराखंड नहीं है। हम अभी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे हैं, लेकिन यदि सरकार नहीं चेती तो यह सत्याग्रह पूरे प्रदेश में तीव्र गति से फैल जाएगा।

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 इस एक दिवसीय सत्याग्रह में हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और ‘UGC Roll Back’ के नारों से तिकोनिया गूंज उठा। कार्यक्रम में अमित चौहान, मुकेश रघुवंशी, प्रकाश शर्मा, हयात सिंह रावत, हरीश कांडपाल, अमर सिंह, पूरन भट्ट, दीवान सिंह, अमित पंत, राकेश नयाल, मदन मोहन जोशी, हरीश रावत, सीमा बत्रा, दीप्ति गुरुरानी, प्रभा खनका, अल्का वार्ष्णेय, प्रियंका वार्ष्णेय, तरनजीत कौर, नेहा शर्मा, प्रियंका सक्सेना, वैशाली लोबियाल, दीपक जोशी, गिरीश पाठक, देव बिष्ट, पी.सी. शर्मा, देवेंद्र सालकोटी, कौशिक धौनी, प्रीति वर्धन उप्रेती, अंबादत्त, हरि सिंह वाणी, खड़क सिंह, सी.सी. पंतोला, नारायण दत्त बडोला, तरुण वानखेड़े, पी.सी. भट्ट, अशोक कुमार मंडल, देवेंद्र सिंह बिष्ट, डॉ. आशुतोष पंत, मनमोहन चौधरी, मुकेश चंद्र शर्मा, दिनेश कुमार तिवारी, राजेश कांडपाल, पूरन चंद्र जोशी सहित सैकड़ों की संख्या में सवर्ण समाज के लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में कई वक्ताओं ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि केंद्र और राज्य सरकार ने यूजीसी कानून को तुरंत वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में और अधिक उग्र आंदोलन का सामना करना पड़ेगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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