देवभूमि जन हुंकार, हरिद्वार / देहरादून: उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस (सतर्कता विभाग) का हंटर लगातार तेज गति से चल रहा है। जनपद हरिद्वार के अंतर्गत रानीपुर कोतवाली से पुलिस महकमे को शर्मसार कर देने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। विजिलेंस की एक सतर्क टीम ने रानीपुर कोतवाली परिसर में ही छापा मारकर वहाँ तैनात महिला अपर उपनिरीक्षक (ASI सोनिया) को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों धर दबोचा। इस सनसनीखेज कार्रवाई से पूरी कोतवाली और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।
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मारपीट के मुकदमे में समझौते के एवज में मांगे जा रहे थे पैसे
विजिलेंस विभाग से प्राप्त आधिकारिक विवरण के अनुसार, रानीपुर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत कुछ समय पूर्व दो पक्षों के बीच मारपीट का एक मामला दर्ज किया गया था। इस आपराधिक मुकदमे की विवेचना व जांच का जिम्मा महिला अपर उपनिरीक्षक सोनिया के पास था।
आरोप है कि विवेचना के दौरान एएसआई सोनिया द्वारा दोनों पक्षों के बीच समझौता कराते हुए मामले का निपटारा करने के एवज में एक पक्ष से लगातार अवैध रूप से पैसों की मांग की जा रही थी। समझौते की एवज में 10 हजार रुपये की रिश्वत तय की गई थी। प्रताड़ित होकर पीड़ित पक्ष ने इस पूरे मामले की गोपनीय शिकायत विजिलेंस हल्द्वानी/देहरादून सेक्टर को दर्ज कराई।
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विजिलेंस टीम ने बिछाया जाल, कोतवाली में ही दबोची गई महिला पुलिसकर्मी
शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस टीम ने अपनी प्रारंभिक गोपनीय जांच में आरोपों को सही पाया, जिसके बाद ट्रैप टीम का गठन किया गया। योजना के तहत शनिवार को पीड़ित पक्ष रिश्वत की तयशुदा रकम 10 हजार रुपये लेकर सीधे रानीपुर कोतवाली पहुँचा।
जैसे ही पीड़ित ने एएसआई सोनिया को वह रकम सौंपी और महिला अधिकारी ने अपने हाथों में पैसे पकड़े, पहले से ही घात लगाकर बैठी विजिलेंस टीम ने उन्हें रंगेहाथों दबोच लिया। अचानक हुई इस विजिलेंस रेड से रानीपुर कोतवाली में मौजूद पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों के होश उड़ गए और भारी अफरा-तफरी मच गई।
देहरादून ले जाकर कोर्ट में पेशी के बाद भेजा गया जेल
कोतवाली परिसर में ही आवश्यक प्रारंभिक पूछताछ और कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद विजिलेंस टीम आरोपित महिला एएसआई सोनिया को अपने साथ तुरंत देहरादून ले गई।
विजिलेंस कार्यालय में विधिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपी एएसआई के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद उन्हें सक्षम न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से अदालत के आदेश पर महिला एएसआई को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत इस प्रकार की सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
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