देवभूमि जन हुंकार, लालकुआं / हल्द्वानी / नैनीताल: देवभूमि उत्तराखंड के जनपद नैनीताल के अंतर्गत लालकुआं क्षेत्र से एक बेहद दुखद, दिल को झकझोर देने वाली और आंखें नम कर देने वाली खबर सामने आ रही है। जहाँ एक ओर सोशल मीडिया और रील्स का नशा युवाओं और किशोरों के सिर चढ़कर बोल रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके अतिरेक और पारिवारिक संवादहीनता के कारण कई बार असमय बहुमूल्य जिंदगियां दांव पर लग जाती हैं। लालकुआं नगर से सटी वर्मा कॉलोनी में सोशल मीडिया पर रील बनाने को लेकर भाई की मामूली फटकार से आहत 14 वर्षीय किशोरी की संदिग्ध परिस्थितियों में दर्दनाक मौत हो गई है। इस हृदयविदारक घटना से पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है और हर कोई स्तब्ध है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, लालकुआं नगर से सटे वीआईपी गेट के पास स्थित वर्मा कॉलोनी निवासी स्वर्गीय संजय सक्सेना की 14 वर्षीय पुत्री राखी सक्सेना बिंदुखत्ता स्थित एक प्रतिष्ठित निजी विद्यालय में कक्षा आठ की छात्रा थी। कम उम्र और स्कूल जाने की इस उम्र में बच्चों के सपनों को उड़ान भरनी चाहिए थी, लेकिन एक छोटे से घरेलू विवाद ने इस हंसते-खेल्ते परिवार को कभी न भरने वाला जख्म दे दिया है।
बताया जा रहा है कि राखी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगातार रील्स बनाने की आदत थी। इसी बात को लेकर उसके 16 वर्षीय बड़े भाई ने उसे टोका और सोशल मीडिया पर ज्यादा सक्रिय रहने को लेकर फटकार लगाई। भाई की इस डांट से किशोरी इतनी अधिक क्षुब्ध हो गई कि उसने आवेश में आकर अपने कमरे के अंदर पंखे के कुंडे से फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त करने का खौफनाक कदम उठा लिया।
घटना की भनक लगते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई और घर में कोहराम मच गया। आनन-फानन में मामले की सूचना लालकुआं कोतवाली पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुँची और फंदे से उतारी गई अद्धमरी किशोरी को तुरंत चिकित्सकीय परीक्षण व उपचार के लिए कुमाऊं के सबसे बड़े डॉ. सुशीला तिवारी चिकित्सालय (STH), हल्द्वानी भिजवाया गया।
अस्पताल में आपातकालीन कक्ष के डॉक्टरों ने जब किशोरी का परीक्षण किया, तो उन्होंने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों द्वारा मौत की पुष्टि किए जाने के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और अस्पताल परिसर में भी शोक की लहर दौड़ गई।
इस दर्दनाक हादसे का सबसे वीभत्स पहलू यह है कि इस गरीब परिवार पर दुखों का पहाड़ पहले से ही टूटा हुआ था। मृतका राखी सक्सेना के सिर से पहले ही पिता (स्वर्गीय संजय सक्सेना) का साया उठ चुका था। घर की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय है। बच्चों का भरण-पोषण करने के लिए उनकी माँ ममता सक्सेना सिडकुल (Sidcul) स्थित एक औद्योगिक कंपनी में दिन-रात मजदूरी करती हैं, ताकि अपने तीन बच्चों को पाल-पोस सकें।
पति को खोने का असहनीय दर्द झेल चुकी माँ के लिए अपनी जवान बेटी की असमय और इस तरह की विदाई किसी वज्रपात से कम नहीं है। इस घटना ने एक बार फिर समाज और हर अभिभावक के सामने यह गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि आधुनिक दौर में बच्चों के साथ किस तरह का संवेदनशील व्यवहार किया जाना चाहिए।
इस मर्मस्पर्शी हादसे के बाद स्थानीय प्रबुद्धजनों और समाजसेवियों ने चिंता जताई है कि आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रहा है। किशोर अवस्था में बच्चों की भावनाएं बहुत कोमल होती हैं। ऐसे में परिवारों में माता-पिता और भाई-बहनों के बीच खुला संवाद (Open Communication) होना बेहद जरूरी है, ताकि बच्चे किसी भी प्रकार के मानसिक तनाव या आवेश में आकर इस तरह के चरम और जानलेवा कदम उठाने से बचें। लालकुआं पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
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