बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान वायरमैन पद पर धांधली का मामला आया सामने
देवभूमि जन हुंकार, ऋषिकेश / देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS Rishikesh) से भर्ती परीक्षाओं की शुचिता को तार-तार करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। एम्स की CRE-3 भर्ती प्रक्रिया के दौरान वायरमैन (Wireman) पद पर चयन और कार्यभार ग्रहण करने में बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है। बायोमेट्रिक सत्यापन (Biometric Verification) की आधुनिक और सख्त तकनीक के कारण यह पूरा फर्जीवाड़ा बेनकाब हो गया, जिसके बाद ऋषिकेश पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राजस्थान के एक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है।
बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान वायरमैन पद के अभ्यर्थी की पहचान पर हुआ संदेह
पुलिस और आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त विस्तृत विवरण के अनुसार, 17 अक्टूबर 2026 को एम्स ऋषिकेश में CRE-3 भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत सफल अभ्यर्थियों का दस्तावेज और बायोमेट्रिक सत्यापन किया जा रहा था। इसी दौरान वायरमैन पद के लिए उपस्थित एक अभ्यर्थी (विकास कुमार मीणा) की पहचान को लेकर बायोमेट्रिक मशीन और अधिकारियों को गंभीर संदेह हुआ।
जब अधिकारियों ने उपलब्ध मूल अभिलेखों और पहचान पत्रों का गहराई से मिलान किया, तो प्रथम दृष्टया यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि परीक्षा में ऑनलाइन या ऑफलाइन रूप से शामिल होने वाला व्यक्ति और एम्स में नियुक्त होकर कार्यभार ग्रहण करने (Joining) पहुँचने वाला व्यक्ति अलग-अलग व्यक्ति थे।
दस्तावेजों पर विवरण थे समान, लेकिन फोटो में निकला अंतर
शातिरों ने फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए मूल दस्तावेजों के विवरण (Details) तो समान रखे थे, ताकि शुरुआती स्तर पर किसी को शक न हो, लेकिन बायोमेट्रिक और फोटो मिलान के दौरान उन पर लगे फोटोग्राफ्स में स्पष्ट अंतर सामने आ गया। इस शातिर प्रतिरूपण (Impersonation) और फर्जीवाड़े के पकड़ में आते ही एम्स प्रशासन में हड़कंप मच गया। संस्थान की ओर से तत्काल इसकी शिकायत ऋषिकेश कोतवाली पुलिस से की गई।
ऋषिकेश कोतवाली में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज, मुख्य आरोपी गिरफ्तार
एम्स प्रशासन की लिखित शिकायत के आधार पर कोतवाली ऋषिकेश पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं—धारा 318(4), 319(2), 336(3), 337, 338, 340(2) और 61(2) के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर लिया। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक बिनेश कुमार को सौंपी गई।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) देहरादून के कड़े निर्देशों तथा पुलिस अधीक्षक ग्रामीण व क्षेत्राधिकारी ऋषिकेश के कुशल पर्यवेक्षण में आरोपियों की धरपकड़ के लिए एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया था। टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई करते हुए नामजद आरोपी अशोक कुमार मीणा (उम्र 40 वर्ष, पुत्र, निवासी जिला जयपुर, राजस्थान) को गहन पूछताछ के बाद 18 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहाँ से अदालत के आदेश पर उसे न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार देहरादून भेज दिया गया है।
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दूसरा आरोपी विकास कुमार मीणा वांछित, पुलिस खंगाल रही है पूरा सिंडिकेट
इस पूरे फर्जीवाड़े के प्रकरण में दूसरा आरोपी विकास कुमार मीणा अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर है और वांछित चल रहा है। ऋषिकेश पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वायरमैन पद की इस भर्ती प्रक्रिया में कथित तौर पर प्रतिरूपण (Impersonation) किस सुनियोजित तरीके से कराया गया और किन-किन फर्जी पहचान संबंधी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
इसके साथ ही, इस फर्जीवाड़े से अवैध लाभ प्राप्त करने वाले अन्य संदिग्धों तथा इस रैकेट में शामिल अन्य संभावित व्यक्तियों की संलिप्तता के पहलुओं पर भी गहराई से जाँच की जा रही है। एम्स जैसी प्रतिष्ठित संस्था में इस तरह की धांधली का सामने आना एक गंभीर विषय है, और पुलिस इस मामले की तह तक जाने के लिए पूरी मुस्तैदी से जुटी हुई है।
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