देवभूमि जन हुंकार, देहरादून / हल्द्वानी: देवभूमि उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी, सनसनीखेज और गर्माती हुई खबर सामने आ रही है। उत्तराखंड सरकार में महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच का पारिवारिक और कानूनी विवाद अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुँच चुका है। मामले की गंभीरता को देखते हुए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी जांच का दायरा और रफ्तार दोनों को तेज करते हुए सोमवार को मंत्री रेखा आर्य के आधिकारिक बयान दर्ज किए हैं, साथ ही विवाद के केंद्र में रही ऑडियो रिकॉर्डिंग को भी अपने कब्जे में ले लिया है।
कैंट थाने में दर्ज कराई गई थी गंभीर धाराओं में एफआईआर
प्राप्त विस्तृत विवरण के अनुसार, यह पूरा मामला तब खुलकर सामने आया जब बीते 15 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने देहरादून के कैंट थाने में अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ एक लिखित प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई। मंत्री द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में पति पर मारपीट, घरेलू हिंसा, मानसिक उत्पीड़न, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने, धोखाधड़ी और जान से मारने की धमकी देने जैसे अत्यंत गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
मंत्री रेखा आर्य का यह भी आरोप है कि उनके पति ने विवाह के समय अपनी पहली शादी की जानकारी उनसे छिपाई थी, और जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उनके साथ गाली-गलौज व मारपीट की गई। सरकारी आवास में कर्मचारियों के सामने अपमानजनक भाषा और जातिसूचक शब्दों के प्रयोग का भी गंभीर आरोप लगाया गया है।
पति गिरधारी लाल साहू का पलटवार— “वायरल ऑडियो एआई (AI) से तैयार किया गया है”
एक तरफ जहाँ मंत्री की शिकायत पर पुलिस और एसआईटी अपनी कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर गिरधारी लाल साहू ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा है। उनका दावा है कि जिस ऑडियो रिकॉर्डिंग को आधार बनाकर उनके खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है और आरोप लगाए जा रहे हैं, वह पूरी तरह फर्जी है तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार की गई है।
गिरधारी लाल साहू ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने बड़ा कदम उठाते हुए मंत्री रेखा आर्य की संपत्ति की भी जांच कराने की मांग उठाई है, और दावा किया है कि उनके पास भारी-भरकम अवैध संपत्ति है (हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है)।
एसआईटी जांच के दायरे में ऑडियो की प्रामाणिकता और अन्य पुराने मामले
जांच एजेंसी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस बात की है कि वायरल ऑडियो रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता, उसमें मौजूद आवाजों और बातचीत की परिस्थितियों की वैज्ञानिक व तकनीकी पड़ताल की जाए। एसआईटी के अधिकारियों का कहना है कि जांच एजेंसी के इन पहलुओं पर अंतिम निष्कर्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
इसके अलावा, जांच के दौरान दोनों पक्षों से जुड़े कुछ अन्य पुराने मामलों और संदर्भों का जिक्र भी सामने आया है, जिनकी प्रासंगिकता और कानूनी स्थिति को अदालत में उपलब्ध रिकॉर्ड्स के आधार पर ही समझा जा सकता है। एसआईटी द्वारा मंत्री के बयान दर्ज करना और ऑडियो को सीज करना इस हाईप्रोफाइल मामले की जांच का सबसे अहम पड़ाव माना जा रहा है।
अब जांच एजेंसी के सामने मुख्य कार्य साक्ष्यों का परीक्षण करना, ऑडियो की फॉरेंसिक जांच कराना और दोनों पक्षों के दावों का सत्य परीक्षण करना होगा। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तराखंड के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है, और सबकी निगाहें एसआईटी की आगामी जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।
देवभूमि जन हुंकार व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें
फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ को लाइक करें



