देवभूमि जन हुंकार, देहरादून / लीगल डेस्क: देवभूमि उत्तराखंड और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय बने ब्लैकमेलिंग और जान से मारने की धमकी देने के एक हाई-प्रोफाइल मामले में गिरफ्तार अभिनेत्री उर्मिला सनावर को अदालत से बहुत बड़ी राहत मिल गई है। एसीजेएम (ACJM) कोर्ट ने दोनों पक्षों के वकीलों की लंबी और विस्तृत दलीलें सुनने के बाद उर्मिला सनावर की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। हालांकि, अदालत से राहत मिलने के बावजूद अभी उनकी जेल से तत्काल रिहाई नहीं हो पाई है, क्योंकि इसके लिए जमानत बॉन्ड और अन्य जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जानी बाकी हैं।
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BNS की धारा 308(5) और 308(7) पर हुई मुख्य बहस, बचाव पक्ष की दलीलें हुईं स्वीकार
मामले की पैरवी कर रही उर्मिला सनावर की अधिवक्ता प्रीति चौहान के अनुसार, अदालत में जमानत अर्जी पर दोपहर करीब एक बजे सुनवाई शुरू हुई। इस दौरान मुख्य रूप से भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(5) और 308(7) की वैधता और उनकी प्रयोज्यता को लेकर तीखी कानूनी बहस छिड़ी, जिनमें अधिकतम 10 साल तक की कैद का प्रावधान है।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से अदालत में पुरजोर दलील दी गई कि मौजूदा मामले के तथ्यों, साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर उर्मिला सनावर के खिलाफ BNS की धारा 308(5) और 308(7) की गंभीर धाराएं कानूनी रूप से लागू नहीं होती हैं। अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद बचाव पक्ष की दलीलों को न्यायसंगत मानते हुए स्वीकार कर लिया और जमानत अर्जी मंजूर करने का आदेश दिया।
अभियोजन पक्ष ने किया विरोध, 10-11 मामले दर्ज होने और वीडियो प्रसारित करने की जताई आशंका
दूसरी ओर, सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने जमानत अर्जी का कड़ा विरोध किया। अभियोजन की ओर से अदालत को जानकारी दी गई कि आरोपी उर्मिला सनावर के खिलाफ विभिन्न जिलों में पहले से ही 10 से 11 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
इसके साथ ही अभियोजन पक्ष ने यह प्रबल आशंका भी जताई कि यदि उन्हें जेल से रिहा कर दिया जाता है, तो वह अन्य लोगों के खिलाफ दोबारा से आपत्तिजनक वीडियो प्रसारित कर सकती हैं। हालांकि, अदालत ने तमाम पक्षों और आशंकाओं को सुनने के बाद कानून सम्मत निर्णय लेते हुए जमानत अर्जी स्वीकार कर ली।
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जमानतदार के रिश्तेदार न होने से रिहाई में हुई देरी, कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने पर होगी रिहाई
अदालत से जमानत मिलने का आदेश पारित होने के बावजूद उर्मिला सनावर की जेल से रिहाई की प्रक्रिया तुरंत पूरी नहीं हो सकी। अधिवक्ता प्रीति चौहान ने स्पष्ट किया कि सहारनपुर से जमानतदार आए थे, किंतु वे आरोपी के रिश्तेदार नहीं थे, जिसके चलते अदालत उनकी जमानत को लेकर संतुष्ट नहीं हुई। इसी तकनीकी वजह से जमानत बॉन्ड दाखिल करने की प्रक्रिया में देरी हो गई है।
बचाव पक्ष के अनुसार, अगले दिन दोपहर तक जमानत बॉन्ड दाखिल करने की सभी प्रक्रियाएं पूरी करने की पूरी तैयारी है, जिसके बाद शाम तक रिहाई का परवाना जारी होने की उम्मीद है। यदि सभी कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं समय पर पूरी हो जाती हैं, तो उर्मिला सनावर शाम के वक्त जेल से बाहर आ सकती हैं। फिलहाल उनकी रिहाई पूरी तरह से सत्यापित जमानत बॉन्ड और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं के समय पर पूरा होने पर निर्भर करती है।
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