देहरादून में बड़ा चिटफंड घोटाला: निवेशकों से करोड़ों की ठगी, छह के खिलाफ मुकदमा दर्ज
देहरादून। राजधानी में एक और बड़ा चिटफंड घोटाला सामने आया है। लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव (एलयूसीसी) की तर्ज पर दून समृद्धि निधि लिमिटेड / सर्व माइक्रोफाइनेंस इंडिया एसोसिएशन नामक कंपनी ने निवेशकों से करोड़ों रुपये की ठगी की है।
कंपनी ने मोटे ब्याज और अधिक कमीशन का झांसा देकर एजेंटों व निवेशकों को फंसाया। मिच्योरिटी पूरी होने के बाद भी जब जमा धन वापस नहीं किया गया, तो पीड़ितों ने पुलिस से शिकायत की।
नेहरू कॉलोनी थाना पुलिस ने इस मामले में कंपनी की डायरेक्टर, फाउंडर मेंबर समेत छह आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामला चौकी बायपास प्रभारी प्रवीण पुंडीर की ओर से दर्ज किया गया है।
पुलिस जांच के अनुसार, संस्कार इंकलेव, दून यूनिवर्सिटी रोड पर स्थित इस कंपनी का कार्यालय वर्ष 2022 से संचालित हो रहा था। कंपनी की डायरेक्टर नीलम चौहान निवासी सरस्वती विहार, नेहरू कॉलोनी और फाउंडर मेंबर जगमोहन सिंह चौहान थे।
जगमोहन सिंह कंपनी के लेन-देन और योजनाओं को देखता था। वह निवेशकों को आरडी, एफडी और डीडीएस योजनाओं में निवेश करने के लिए मोटे ब्याज का लालच देता था।
लोगों ने झांसे में आकर कंपनी में खाते खुलवाए और बड़ी रकम जमा कराई। मगर मिच्योरिटी अवधि पूरी होने के बाद भी न तो रकम लौटाई गई और न ही ब्याज दिया गया।
ये लोग चलाते थे पूरा नेटवर्क
जगमोहन सिंह चौहान ने कंपनी में एक संगठित नेटवर्क तैयार किया था।
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कमलेश बिजल्वाण निवासी जीवनवाला भानियावाला डोईवाला को जोनल हेड,
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कुसुम शर्मा निवासी टीएचडीसी कॉलोनी एमडीडीए केदारपुरम को ब्रांच हेड,
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अनित रावत निवासी मोथरोवाला डांडी नेहरू कॉलोनी को एडमिन मैनेजर,
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और दीपिका को कैशियर के रूप में नियुक्त किया गया था।
इन सभी ने मिलकर एजेंटों और स्थानीय लोगों को अधिक कमीशन का लालच देकर निवेश कराने का काम किया।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि कंपनी में अधिकतर लेन-देन नकद में किया जाता था। कुछ रकम बैंक खातों में जमा होती थी, पर मिच्योरिटी पर जमाकर्ताओं को अधिकांश धन नकद ही लौटाया जाता था।
कंपनी में लगभग 30 एजेंट व एडवाइजर कार्यरत थे, जो स्थानीय लोगों को जोड़कर आरडी, एफडी और डीडीएस खातों में निवेश करवाते थे।
निवेश के समय जमाकर्ताओं को फर्जी बांड दिए जाते थे, जिन पर कंपनी डायरेक्टर के हस्ताक्षर नहीं होते थे। निर्धारित अवधि पूरी होने पर भी जब रकम नहीं मिली, तब निवेशकों ने हंगामा कर पुलिस से शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस के अनुसार, कंपनी के खातों, दस्तावेजों और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी सामने आई है। पुलिस ने सभी आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और विश्वासघात की धाराओं में केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
