मनरेगा भुगतान विवाद: पुरोला विधायक दुर्गेश्वर लाल और पत्नी के खातों में मजदूरी राशि, जांच के आदेश
उत्तरकाशी। उत्तरकाशी जिले की पुरोला विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक दुर्गेश्वर लाल और उनकी पत्नी निशा के बैंक खातों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत मजदूरी भुगतान का मामला अब राज्य स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच तेज कर दी है और भुगतान की गई राशि की वसूली की घोषणा की गई है।
पुराने जॉब कार्ड के आधार पर हुआ भुगतान
विकासखंड स्तर के अधिकारियों का कहना है कि यह भुगतान विधायक बनने से पूर्व तैयार किए गए पुराने मनरेगा जॉब कार्ड के आधार पर ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से ट्रांसफर हुआ। अधिकारियों के अनुसार, तकनीकी रूप से जॉब कार्ड निरस्त न होने के कारण भुगतान की प्रक्रिया पूरी हो गई।
पोर्टल पर दर्ज कार्य और भुगतान का विवरण
मनरेगा के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार— जून 2022 में विधायक की पत्नी निशा को रेकचा के साझा मार्ग पर पीसीसी खड़ंजा निर्माण कार्य में मजदूरी भुगतान दर्शाया गया है। अगस्त-सितंबर 2024 में बाजुड़ी टोक में पीसीसी निर्माण नवंबर 2024 में समलाड़ी टोक में पौधारोपण कार्य वहीं, वर्ष 2025 में स्वयं विधायक दुर्गेश्वर लाल को पिनेची टोक में भूमि सुधार कार्य के अंतर्गत रोजगार प्रदान किया गया दिखाया गया है।
पोर्टल के अनुसार, विधायक पद पर रहते हुए तीन परियोजनाओं में 5,214 रुपये, जबकि वर्ष 2021 से 2025 तक कुल 11 परियोजनाओं में पति-पत्नी के खातों में 22,962 रुपये का भुगतान दर्ज है।
मस्टर रोल पर हस्ताक्षर नहीं, रिकॉर्ड भी नदारद
शुक्रवार को ब्लॉक कार्यालय में जब इस संबंध में क्षेत्रीय मनरेगा सहायक यशवंत से पूछताछ की गई, तो उन्होंने बताया कि संबंधित उपस्थिति रजिस्टर (मस्टर रोल) पर विधायक या उनकी पत्नी के हस्ताक्षर मौजूद नहीं हैं, और न ही कार्यालय में इस भुगतान से जुड़ी फाइलें या दस्तावेज उपलब्ध हैं।
विधायक का बयान: साजिश के तहत बदनाम करने का प्रयास इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक दुर्गेश्वर लाल ने कहा— “बिचौलियों के कारोबार बंद होने से वे मुझे निशाना बना रहे हैं। मनरेगा में भुगतान तभी होता है जब उपस्थिति दर्ज हो। यह मेरी छवि धूमिल करने की सुनियोजित साजिश है। विधायक बनने से पहले मेरा जॉब कार्ड जरूर था।”
BDO ने दिए जांच और वसूली के निर्देश
मोरी के खंड विकास अधिकारी शशि भूषण बिंजोला ने कहा कि— “मामले को गंभीरता से लिया गया है। शनिवार को आराकोट में आयोजित सार्वजनिक सेवा शिविर के बाद सभी संबंधित कर्मचारियों से विवरण लिया जाएगा। जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उससे मनरेगा के अंतर्गत जारी की गई पूरी राशि की वसूली की जाएगी।”
प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल इस प्रकरण ने न केवल मनरेगा प्रणाली की निगरानी, बल्कि जॉब कार्ड निरस्तीकरण और भुगतान सत्यापन प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।
