देवभूमि में रिश्तों का कत्ल: सगे भाई ने ही रची खौफनाक साजिश, चाची-चचेरे भाइयों संग मिलकर उतारा मौत के घाट
पिथौरागढ़। उत्तराखंड के शांत माने जाने वाले वनराजी क्षेत्र के भक्तिरवा किमखोला गांव से एक ऐसी दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने इंसानियत ही नहीं, रिश्तों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक युवक की बेरहमी से हत्या कर दी गई—और हैरानी की बात यह कि इस खून में उसका सगा भाई भी शामिल निकला।
मिली जानकारी के अनुसार, 35 वर्षीय कुंदन सिंह का 22 मार्च को अपनी चाची बसंती देवी से किसी बात को लेकर विवाद हो गया। मामूली कहासुनी देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गई। आरोप है कि चाची बसंती देवी, उसके बेटे जनक और रमेश के साथ-साथ कुंदन का सगा भाई प्रदीप भी मौके पर पहुंच गया—और फिर चारों ने मिलकर कुंदन पर लोहे की रॉड और डंडों से ताबड़तोड़ वार शुरू कर दिए।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमलावरों का गुस्सा इतना ज्यादा था कि उन्होंने कुंदन को तब तक पीटा जब तक उसकी मौके पर ही मौत नहीं हो गई। हत्या के बाद भी आरोपियों का दिल नहीं पसीजा—बल्कि अगले दिन सुबह उन्होंने शव को ठिकाने लगाने के लिए जंगल में फेंक दिया, ताकि वारदात का कोई सुराग न मिल सके।
घटना का खुलासा तब हुआ जब मृतक की पत्नी रेखा देवी ने हिम्मत दिखाते हुए जौलजीबी थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए जंगल में सर्च ऑपरेशन चलाया और कुछ ही समय में कुंदन का शव बरामद कर लिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, जहां हत्या की पुष्टि हुई।
पूछताछ में जो सच सामने आया, उसने सबको हैरान कर दिया। पुलिस के अनुसार, कुंदन का अपने परिवार के साथ अक्सर विवाद होता था, और इसी रंजिश ने इस खौफनाक हत्याकांड को जन्म दिया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उसके सगे भाई प्रदीप ने भी चाची और चचेरे भाइयों का साथ देते हुए हत्या में हिस्सा लिया।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चारों आरोपियों—बसंती देवी, जनक सिंह, रमेश सिंह और प्रदीप सिंह—को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। सीओ केएस रावत ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम पिथौरागढ़ जिला अस्पताल में कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है।
इस निर्मम हत्या ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। गांव के लोग सदमे में हैं और हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल है—आखिर रिश्ते इतने खौफनाक कैसे हो गए?
मृतक कुंदन सिंह अपने पीछे दो छोटे-छोटे बच्चों को छोड़ गया है, जिनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। यह घटना न सिर्फ एक परिवार को तबाह कर गई, बल्कि समाज को भी सोचने पर मजबूर कर रही है।
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