उत्तराखंड के स्कूलों में श्रीमद्भगवद्गीता और रामायण होंगी पाठ्यक्रम का हिस्सा, भारतीय ज्ञान परंपरा को मिलेगा बढ़ावा
देहरादून, 15 जुलाई 2025: उत्तराखंड सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) के तहत स्कूली पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा और जीवन मूल्यों को एकीकृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इस पहल के तहत, श्रीमद्भगवद्गीता और रामायण के शिक्षाप्रद अंशों को आगामी शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों के लिए अंतःविषयक क्षेत्रों की पाठ्यपुस्तकों में शामिल किया जाएगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 छात्रों में चारित्रिक और नैतिक गुणों के विकास पर जोर देती है और उन्हें भारत की समृद्ध प्राचीन ज्ञान परंपरा से जोड़ने का अभिनव प्रयास कर रही है। इसी के आलोक में, उत्तराखंड राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा में भी भारतीय ज्ञान परंपरा और स्थानीय संदर्भित ज्ञान प्रणाली के अध्ययन की सिफारिश की गई है।
हाल ही में, 06 मई, 2025 को माननीय मुख्यमंत्री और माननीय शिक्षा मंत्री को राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा से अवगत कराया गया था। इस बैठक में, माननीय मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से निर्देश दिए कि भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत उत्तराखंड के विद्यार्थियों को श्रीमद्भगवद्गीता और रामायण को भी विद्यालयी शिक्षा की रूपरेखा के साथ पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाए। इन निर्देशों को “उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा हेतु राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा” में पहले ही शामिल कर लिया गया है।
शिक्षा मंत्री, डॉ. धन सिंह रावत ने इस पहल पर बल देते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा, जो कि विश्व की प्राचीनतम प्रणालियों में से एक है, का अध्ययन छात्र-छात्राओं में नैतिक, शारीरिक, आध्यात्मिक एवं बौद्धिक पहलुओं का संवर्द्धन करेगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत, जिसे कभी ज्ञान के क्षेत्र में विश्वगुरु का दर्जा प्राप्त था, अब तेजी से आधुनिक विश्व में अपना स्थान पुनः स्थापित कर रहा है। हमारी जीवंत राष्ट्रीय विरासत और वातावरण का अध्ययन विद्यार्थियों के भावी जीवन का मार्गदर्शन करेगा।
उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा हेतु राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा की अनुशंसाओं के अनुरूप, आगामी शैक्षणिक सत्र से नई पाठ्यपुस्तकें शुरू की जानी प्रस्तावित हैं। इन पुस्तकों में भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ-साथ श्रीमद्भगवद्गीता और रामायण के अध्यायों को भी समाहित किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जुड़ने और प्राचीन भारतीय ज्ञान से प्रेरणा लेने का अवसर मिलेगा।
