तीन क्लर्क बने चपरासी
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1 मिनट में 25 शब्द भी नहीं टाइप कर पाए बाबू! DM का बड़ा एक्शन—तीन क्लर्क बने चपरासी

कानपुर। कलेक्ट्रेट में कार्यरत तीन जूनियर क्लर्कों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला प्रशासन ने उन्हें पदावनत कर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (चपरासी) बना दिया है। यह कदम निर्धारित टाइपिंग टेस्ट में लगातार असफल रहने के बाद उठाया गया, जिससे सरकारी दफ्तरों में कार्यक्षमता और योग्यता को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।

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जानकारी के अनुसार, प्रेमनाथ यादव, अमित कुमार यादव और नेहा श्रीवास्तव की नियुक्ति मृतक आश्रित कोटे के तहत लगभग दो वर्ष पूर्व कनिष्ठ लिपिक (जूनियर क्लर्क) पद पर हुई थी। नियमानुसार इस पद पर बने रहने के लिए निर्धारित समयावधि के भीतर टाइपिंग टेस्ट पास करना अनिवार्य होता है, जिसमें प्रति मिनट कम से कम 25 शब्द टाइप करना जरूरी है।

वर्ष 2024 में आयोजित पहली टाइपिंग परीक्षा में तीनों कर्मचारी असफल रहे थे। उस समय विभाग ने कड़ी कार्रवाई के बजाय उनकी वेतन वृद्धि रोकते हुए उन्हें सुधार का अवसर दिया। इसके बावजूद वर्ष 2025 में आयोजित दूसरी परीक्षा में भी तीनों आवश्यक मानक हासिल नहीं कर सके।

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लगातार दो बार असफल रहने के बाद जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह के निर्देश पर विभागीय समीक्षा की गई। समीक्षा में पाया गया कि संबंधित कर्मचारी पद के लिए आवश्यक बुनियादी योग्यता पूरी नहीं कर पा रहे हैं। इसके बाद प्रशासन ने तीनों को लिपिक पद से हटाकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में तैनात करने का निर्णय लिया।


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