🔥 सनसनीखेज खबर | जंगल में गोलियों की गूंज का 5 साल बाद इंसाफ 🔥
हल्द्वानी। नैनीताल जिले के कालाढूंगी थाना क्षेत्र में साढ़े पांच साल पहले वनकर्मियों पर हुई ताबड़तोड़ फायरिंग के सनसनीखेज मामले में आखिरकार न्याय का हथौड़ा चल गया। कोर्ट ने इस खूनखराबे में शामिल चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुना दी है।
इस खौफनाक वारदात में वन विभाग के बीट वॉचर बहादुर सिंह की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि एक अन्य वनकर्मी गंभीर रूप से घायल हुआ था।
🌲 आधी रात जंगल में मचा था खूनी तांडव
एडीजीसी गिरीश शंकर पांडे के मुताबिक, घटना 22 जून 2019 की आधी रात की है। बहेड़ी वन रेंज की टीम को सूचना मिली थी कि बीर नदी के पास महोली जंगल में अवैध लकड़ी की तस्करी चल रही है।
सूचना मिलते ही वन रक्षक दीपक नेगी के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुंची। जैसे ही वनकर्मियों ने तस्करों को रोका, वैसे ही आरोपियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
🔴 सीने में लगी गोली, बीट वॉचर शहीद
फायरिंग के दौरान बीट वॉचर बहादुर सिंह के सीने में गोली लगी और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं, वनकर्मी महेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी जंगल का फायदा उठाकर फरार हो गए।
🚓 पुलिस जांच, 20 गवाह और कोर्ट ट्रायल
मामले में वन रक्षक दीपक नेगी की तहरीर पर कालाढूंगी पुलिस ने लखवीर सिंह निवासी बाजपुर समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। लंबी जांच और कोर्ट ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने 20 अहम गवाह पेश किए।
⚖️ कोर्ट का कड़ा फैसला – उम्रकैद
सभी सबूतों और गवाहों के आधार पर द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश, हल्द्वानी की अदालत ने लखवीर सिंह, करण सिंह, परमजीत सिंह उर्फ सूरज सिंह सहित चारों आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
यह फैसला न केवल शहीद बीट वॉचर बहादुर सिंह को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि वन माफिया और अवैध लकड़ी तस्करों के लिए एक कड़ा चेतावनी संदेश भी है।
