कपकोट में 110 मीटर मोटर पुल का निर्माण अब तक नहीं, एप्रोच रोड न होने से अटका कार्य; विधानसभा में उठे कई अहम सवाल
संवाददाता सीमा खेतवाल
बागेश्वर। विधानसभा के प्रथम सत्र 2026 के प्रथम मंगलवार को कपकोट के विधायक सुरेश गड़िया द्वारा विभिन्न जनहित से जुड़े मुद्दे सदन में उठाए गए। उन्होंने अतारांकित प्रश्न संख्या–11 के माध्यम से जनपद बागेश्वर के कपकोट विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2018 की आपदा से क्षतिग्रस्त भकुना–नाचनी रामगंगा नदी पर प्रस्तावित 110 मीटर स्पान मोटर पुल के निर्माण में हो रही देरी को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
इस पर लोक निर्माण विभाग मंत्री सतपाल महाराज ने सदन में जानकारी देते हुए बताया कि उक्त मोटर पुल के निर्माण के लिए एप्रोच रोड उपलब्ध नहीं होने के कारण अभी तक पुल का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। उन्होंने बताया कि विधायक निधि से लगभग 2 किलोमीटर मोटर मार्ग का निर्माण पुल के पहुंच मार्ग तक किया जा रहा है।
मंत्री ने बताया कि उक्त पुल के निर्माण के लिए विश्व बैंक से वित्त पोषण की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। वर्तमान में विश्व बैंक के अंतर्गत डीपीआर (DPR) तैयार करने की कार्यवाही लायन कंसल्टेंसी (Lion Consultancy) द्वारा की जा रही है। इसके अलावा कार्यों को शीघ्रता से आगे बढ़ाने के लिए सुपरविजन कंसल्टेंसी की नियुक्ति की प्रक्रिया भी गतिमान है।
इसके साथ ही विधायक सुरेश गड़िया ने सदन में अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाए। उन्होंने वन मंत्री से पूछा कि वर्ष 2024 में प्रदेश भर में कितने हेक्टेयर जंगल आग से प्रभावित हुए, वनाग्नि की कितनी घटनाएं हुईं तथा पीड़ितों को मुआवजे के रूप में कितनी धनराशि दी गई और कितनी राशि अभी लंबित है। साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि वनाग्नि की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
इसके अतिरिक्त विधायक ने पर्यटन मंत्री से भी प्रश्न करते हुए पूछा कि पिछले पांच वर्षों में प्रदेश के विभिन्न ग्लेशियरों में ट्रेकिंग के दौरान भारी बर्फबारी, हिमस्खलन और एवलांच के कारण कितने ट्रेकर्स और पर्यटकों की मौत या चोटिल होने की घटनाएं हुई हैं। उन्होंने यह भी जानकारी मांगी कि ऐसे हादसों में मृतक व घायलों को कितना मुआवजा दिया गया और कितने मामले अभी लंबित हैं।
विधायक ने सरकार से यह भी पूछा कि प्रदेश के विभिन्न ग्लेशियर क्षेत्रों में ट्रेकिंग के दौरान होने वाली आपदाओं से निपटने के लिए क्या कोई ठोस योजना या पूर्वानुमान प्रणाली तैयार की गई है।
