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दुष्कर्म पीड़िता को पुलिसिया सिस्टम ने झकझोरा, बनभूलपुरा थाने में न्याय के बजाय अपमान

हल्द्वानी — उत्तराखंड के बनभूलपुरा क्षेत्र में एक युवती ने पुलिस पर गंभीर लापरवाही और पक्षपातपूर्ण रवैये का आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि वह एक युवक द्वारा किए गए दुष्कर्म के मामले में न्याय की गुहार लगाने थाने गई थी, लेकिन वहां उसे चोरों की तरह व्यवहार झेलना पड़ा।

पीड़िता के अनुसार, क्षेत्र निवासी युवक फरदीन ने पहले उसके साथ दुष्कर्म किया था। इस मामले में फरदीन को जेल भेजा गया था, लेकिन अब वह जमानत पर रिहा हो चुका है। जेल से बाहर आने के बाद से ही वह पीड़िता को बार-बार रास्ते में रोककर केस वापस लेने का दबाव बना रहा है और जान से मारने की धमकी दे रहा है।

युवती ने बताया कि 15 मई को जब वह अपनी मां का यूरिन सैंपल जांच कराने जा रही थी, तब अब्दुल्लाह बिल्डिंग के पास फरदीन ने उसे घेरकर धमकाया। उसने साफ शब्दों में कहा कि यदि केस वापस नहीं लिया तो जान से मार देगा। यही नहीं, 19 मई की रात को जब वह अपनी मां के साथ दादी के घर से लौट रही थी, तब फरदीन ने रास्ते में दुर्व्यवहार करते हुए गालियां दीं और तेजाब फेंकने की धमकी दी। मां के विरोध करने पर वह मौके से भाग गया।

पीड़िता ने बताया कि घटना की सूचना देने जब वह मां के साथ बनभूलपुरा थाने पहुंची, तो पुलिस ने उन्हें अगले दिन सुबह आने को कहा। 20 मई को फिर से थाने जाने पर सिर्फ आश्वासन मिला, मगर एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

इसके बाद 2 जून को थाने से एक सिपाही का फोन आया। जब वह मां के साथ दोबारा थाने पहुंची तो देखा कि वही सिपाही थाने के बाहर चाय की दुकान पर फरदीन के पिता के साथ बैठा हुआ था। वहीं पर राजीनामा करने का दबाव बनाया गया।

12 जून को उन्हें फिर थाने बुलाया गया। लेकिन इस बार जो हुआ, वह पीड़िता की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर गया। पुलिस ने उन्हें थाने के पीछे बने बंदीगृह में बैठा दिया और फरदीन के पिता को खुली छूट दी कि वह उन्हें धमका सके। पीड़िता का आरोप है कि सिपाहियों की मौजूदगी में ही आरोपी के पिता ने उन्हें गालियां दीं और डराने की कोशिश की।

यह भी आरोप है कि पुलिस ने मां-बेटी को धमकाते हुए एक राजीनामा पत्र पर जबरन हस्ताक्षर करवा लिए। उन्हें कहा गया कि अगर हस्ताक्षर नहीं किए, तो जेल भेज दिया जाएगा। इसके बाद से पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई।

पीड़िता ने कई बार उच्चाधिकारियों को शिकायत भेजी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अंततः कोर्ट के आदेश के बाद बनभूलपुरा पुलिस को मजबूरन केस दर्ज करना पड़ा और मामले की जांच शुरू हुई।


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