हल्द्वानी में संगठनों का पुतला दहन
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अंकिता भंडारी हत्याकांड: वीआईपी आरोपी पर मुकदमे की मांग, हल्द्वानी में विभिन्न संगठनों का पुतला दहन

हल्द्वानी | अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। बुधवार को प्रगतिशील भोजनमाता संगठन उत्तराखंड, परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास), प्रगतिशील महिला एकता केंद्र (प्रमएके) और क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन (क्रालोस) ने संयुक्त रूप से हल्द्वानी के बुद्ध पार्क तिकोनिया में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान आरोपित ‘वीआईपी’ के खिलाफ आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग को लेकर पुतला दहन किया गया।

पुतला दहन के बाद प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल उत्तराखंड, देहरादून के नाम सिटी मजिस्ट्रेट हल्द्वानी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा और मामले में तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि अंकिता भंडारी की हत्या बीते तीन वर्षों से उत्तराखंड में एक गंभीर और संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है। अंकिता अपने परिवार की मदद के लिए रोजगार की तलाश में निकली थी, लेकिन रिजॉर्ट में उस पर आरोपी पुलकित आर्य और अन्य द्वारा कथित तौर पर एक वीआईपी को “स्पेशल सर्विस” देने का दबाव बनाया गया।

वक्ताओं का आरोप है कि आत्मसम्मान के साथ काम करने से इनकार करने पर सत्ता और संपत्ति के नशे में चूर लोगों ने अंकिता की निर्मम हत्या कर दी।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शुरुआत से ही अंकिता के परिजन और न्यायप्रिय जनता वीआईपी आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की मांग करते रहे हैं, लेकिन राज्य सरकार लगातार उसे बचाने का प्रयास करती नजर आई। सीबीआई जांच की मांग को भी सरकार द्वारा ठुकराए जाने का आरोप लगाया गया।

वक्ताओं ने दावा किया कि हाल के दिनों में भाजपा से जुड़े कुछ लोगों द्वारा भाजपा के प्रदेश प्रभारी व राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम और यमकेश्वर ब्लॉक से पूर्व जिला पंचायत सदस्य आरती गौड़ के नाम सामने आने की बातें कही गई हैं। इससे पहले भी भाजपा से जुड़े कई नेताओं के नाम कयासों में आ चुके हैं।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि संभवतः वीआईपी आरोपी सत्तारूढ़ दल से जुड़ा होने के कारण मुख्यमंत्री राज्य के मुखिया की बजाय पार्टी कार्यकर्ता की तरह व्यवहार कर रहे हैं।

सभा में कहा गया कि अंकिता को न्याय दिलाने के लिए उसके परिजनों और संघर्षशील जनता की लड़ाई जारी रहेगी और एक दिन यह संघर्ष न सिर्फ अंकिता बल्कि महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा के मामलों में न्याय की मिसाल बनेगा। संगठनों ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप कर सभी आरोपियों को न्याय के कठघरे में खड़ा करने की मांग की।

इस दौरान रजनी जोशी, चम्पा गिनवाल, पुष्पा कुंडाई, सीमा पाण्डेय, भावना, जानकी, महेश, चन्दन, मुकेश भंडारी, अनिशेख रियासत सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।


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