25 साल के उत्तराखंड का कड़वा सच: मरीज चारपाई पर
Spread the love

25 साल के उत्तराखंड का कड़वा सच: मरीज चारपाई पर, सड़क और इलाज दोनों नदारद

भीमताल। उत्तराखंड के विकास के दावों की जमीनी हकीकत एक बार फिर सामने आई है। जिला मुख्यालय से महज 30 किलोमीटर और विकासखंड से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत जंगलिया गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के अभाव में ग्रामीणों को आज भी बीमारों को चारपाई पर ढोने को मजबूर होना पड़ रहा है।

ताजा मामला जंगलिया गांव का है, जहां तोक नौली निवासी 70 वर्षीय सावित्री देवी पत्नी स्वर्गीय पनी राम लंबे समय से बीमार चल रही थीं। हालत बिगड़ने पर परिजन और ग्रामीण उन्हें तोक नौली से सैम धार तक लगभग एक किलोमीटर लंबी खड़ी चढ़ाई पार कर चारपाई में उठाकर लाए। इसके बाद उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भीमताल ले जाने की तैयारी की गई।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने के कारण आपात स्थिति में मरीजों को भगवान के भरोसे ही चारपाई या डंडी-कंडी के सहारे लाना पड़ता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भीमताल में भी मूलभूत जांच सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। यहां न तो एक्स-रे की सुविधा है और न ही अल्ट्रासाउंड जैसी आवश्यक जांच उपलब्ध है, जिससे गंभीर मरीजों को हल्द्वानी या अन्य दूरस्थ अस्पतालों के लिए रेफर करना पड़ता है।

ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि राज्य गठन के 25 वर्ष बाद भी अगर गांवों की यह हालत है तो सरकारों के विकास के दावे सिर्फ कागजों तक ही सीमित नजर आते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं।

ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि जंगलिया गांव और आसपास के तोकों को जल्द सड़क सुविधा से जोड़ा जाए और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक जांच और उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि ग्रामीणों को ऐसी पीड़ा दोबारा न झेलनी पड़े।


Spread the love