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भीमताल औद्योगिक घाटी में आईटी आधारित उद्योग खोलने की मांग, रोजगार के लिए उठी आवाज

भीमताल। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी प्रेम सिंह कुल्याल ने भीमताल की औद्योगिक घाटी में आईटी (सूचना प्रौद्योगिकी) से संबंधित उद्योग स्थापित कर स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि वर्षों से वीरान पड़ी औद्योगिक घाटी को फिर से विकसित कर आधुनिक तकनीकी उद्योगों का केंद्र बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि सत्तर और अस्सी के दशक में भीमताल क्षेत्र के किसानों की भूमि अधिग्रहित कर यहां कई उद्योग स्थापित किए गए थे। शुरुआती समय में ये उद्योग चले भी, लेकिन कुछ वर्षों बाद एक-एक कर बंद होते चले गए और आज यह औद्योगिक क्षेत्र पूरी तरह वीरान पड़ा है।

प्रेम सिंह कुल्याल का कहना है कि भीमताल और आसपास के क्षेत्रों में कई तकनीकी और शैक्षणिक संस्थान मौजूद हैं, जहां से हर साल बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं डिग्री प्राप्त करते हैं। लेकिन स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर न होने के कारण उन्हें या तो दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है या फिर बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है।

इसी मुद्दे को लेकर देवभूमि व्यापार मंडल द्वारा 17 सूत्रीय मांगों को लेकर चल रहे अनशन के दौरान भी यह मांग प्रमुख रूप से उठाई गई। अनशन स्थल पर उपजिलाधिकारी (एसडीएम) आंदोलनकारियों से वार्ता करने पहुंचे, लेकिन वार्ता का कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सका।

स्थानीय लोगों और आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि भीमताल की औद्योगिक घाटी में आईटी और आधुनिक तकनीक से जुड़े उद्योग स्थापित किए जाते हैं, तो इससे क्षेत्र के युवाओं को रोजगार मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

उन्होंने सरकार से मांग की है कि वीरान पड़ी औद्योगिक भूमि का उचित उपयोग करते हुए भीमताल को आईटी और तकनीकी उद्योगों का हब बनाया जाए, ताकि स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिल सके और पलायन की समस्या पर भी रोक लग सके।


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