नंदानगर में तबाही: नीमा की शादी से पहले उजड़ा घर
शादी के जेवर, साड़ियां और अनाज बहकर तबाही का मंजर छोड़ गए।
चमोली। उत्तराखंड के चमोली जनपद के नंदानगर क्षेत्र में 17 सितंबर की रात एक भयावह आपदा बनकर टूटी। अचानक बादल फटने से आए सैलाब ने कई घरों को मलबे में तब्दील कर दिया। किसी के घर उजड़ गए तो किसी की खुशियां पल भर में मिट्टी में मिल गईं। इस त्रासदी को जिसने भी देखा, उसकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
सेरा गांव में आपदा का असर सबसे ज्यादा देखा गया। यहां महिपाल गुसाईं समेत सात लोगों के घर तेज बहाव में बह गए। घरों के साथ जेवरात, अनाज, कपड़े और शादी-ब्याह के लिए जुटाया गया सामान भी सब बह गया। महिपाल गुसाईं की बेटी नीमा की शादी 24 सितंबर को होनी थी। परिवार ने घर को सजाने-संवारने से लेकर मेहमानों के स्वागत तक की तैयारियां कर रखी थीं, लेकिन सैलाब ने सब कुछ तबाह कर दिया। जिस आंगन में शादी की चहल-पहल और गीत गूंजने वाले थे, वहां आज सिर्फ मलबा और खामोशी फैली है।
महिपाल गुसाईं ने बताया कि हादसे के समय वह अपने बेटे और बेटी के साथ गोपेश्वर में थे, जबकि घर पर केवल उनकी पत्नी मौजूद थी। गनीमत रही कि पत्नी सुरक्षित बच गईं, लेकिन उनका आशियाना, गौशाला और जीवन भर की जमा-पूंजी पानी के साथ बह गई। महिपाल गुसाईं का कहना है कि गुरुवार को उन्हें शादी की तैयारियों के लिए गांव लौटना था, लेकिन उससे पहले ही कुदरत ने सब कुछ उजाड़ दिया।
बुधवार देर रात करीब 2 बजे बादल फटने के बाद कुंतरी लगा फाली, सेरा और धुर्मा गांवों में भारी तबाही मच गई। पानी का स्तर तेजी से बढ़ा और कई लोग इसकी चपेट में आ गए। अब तक पांच शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि एक व्यक्ति को करीब 16 घंटे के रेस्क्यू के बाद सुरक्षित निकाला गया। कई लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और पुलिस की टीमें युद्धस्तर पर कर रही हैं।
जिलाधिकारी संदीप तिवारी और पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार लगातार मौके पर डटे हुए हैं। प्रभावित परिवारों तक खाद्यान्न सामग्री पहुंचाई जा रही है और घायलों को एयरलिफ्ट कर बड़े अस्पतालों में भेजा जा रहा है। हालांकि, नंदानगर क्षेत्र के लोगों के लिए 17 सितंबर की यह काली रात हमेशा दर्द और भयावह यादों के रूप में बनी रहेगी।
