सरकारी धान कुटाई में 98 लाख का गबन, 2811 क्विंटल चावल गायब: रुद्रपुर की राइस मिल पर FIR से हड़कंप
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सरकारी धान कुटाई में 98 लाख का गबन, 2811 क्विंटल चावल गायब: रुद्रपुर की राइस मिल पर FIR से हड़कंप

रुद्रपुर। जनपद में सरकारी धान कुटाई के नाम पर बड़े पैमाने पर गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बिंदुखेड़ा रोड स्थित स्वास्तिक राइस लैंड प्राइवेट लिमिटेड पर उत्तराखंड प्रादेशिक को-ऑपरेटिव यूनियन लिमिटेड (पीसीयू) का 2811 क्विंटल चावल खुर्द-बुर्द करने का गंभीर आरोप लगा है। इस गबन से सरकार को करीब 98.47 लाख रुपये की राजस्व हानि हुई है।

पीसीयू प्रबंधन की तहरीर पर पुलिस ने मिल के दो निदेशकों और लेखाकार के खिलाफ धोखाधड़ी व गबन की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

कैसे हुआ खेल

पीसीयू के क्षेत्रीय प्रबंधक धीरज कुमार के अनुसार, खरीफ सत्र 2023-24 में मूल्य समर्थन योजना के तहत ग्राम दानपुर, बिंदुखेड़ा रोड स्थित स्वास्तिक राइस लैंड को 4462 क्विंटल धान कुटाई के लिए आवंटित किया गया था। शासन की नीति के मुताबिक 67 प्रतिशत रिकवरी के आधार पर मिल को 2989.54 क्विंटल चावल सरकारी गोदामों में जमा करना अनिवार्य था।

भारत सरकार द्वारा निर्धारित अंतिम तिथि 15 सितंबर 2024 तक मिल को चावल जमा करना था, लेकिन तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी मिल ने केवल 178.20 क्विंटल चावल ही जमा किया। शेष 2811.34 क्विंटल चावल का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला, जिससे पूरे प्रकरण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

जांच में चौंकाने वाले खुलासे

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर 18 अक्टूबर 2024 को नायब तहसीलदार रुद्रपुर सुरेश चंद्र बुधलाकोटी के नेतृत्व में राइस मिल का भौतिक सत्यापन किया गया। जांच टीम को मिल परिसर में धान का एक भी दाना नहीं मिला। मौके पर केवल 23 केजी टूटा चावल, 320 केजी एफआरके और कुछ खाली बोरे पाए गए।

इससे स्पष्ट हो गया कि सरकारी धान या उससे तैयार चावल को बाजार में बेचकर या अन्य तरीकों से गबन कर दिया गया।

वादे, शपथपत्र और फिर मुकरना

सत्यापन के बाद मिल के निदेशक ने शपथपत्र देकर छह माह में बकाया राशि चुकाने का भरोसा दिया। निदेशक पुरुषोत्तम दास और उनके पुत्र आशीष ने नई फर्म बनाकर और बैंक ऋण लेकर भुगतान करने का दावा किया, लेकिन बाद में वे अपने वादों से मुकर गए।

जमानत के तौर पर दिए गए चेकों को लेकर भी उनके अधिवक्ता के माध्यम से नोटिस भेजा गया कि चेक बैंक में प्रस्तुत न किए जाएं, जिससे खातों में धनराशि न होने की पुष्टि हो गई।

FIR दर्ज, जांच तेज

पीसीयू द्वारा 10 जुलाई 2025 तक भुगतान का अंतिम अवसर दिए जाने के बावजूद जब 98,47,788 रुपये की रिकवरी नहीं हो सकी, तो विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए कानूनी कार्रवाई की।

इसके बाद पुलिस ने निदेशक पुरुषोत्तम दास, निदेशक लक्ष्मी अग्रवाल और लेखाकार राजेंद्र सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी व गबन का मुकदमा दर्ज कर लिया है। फिलहाल पुलिस मिल के बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों की गहन जांच कर रही है।

इस मामले ने जिले में सरकारी धान खरीद और मिलिंग व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।


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