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धामी सरकार के चार वर्ष: सुशासन, विकास और नवाचार की नई पहचान — शिक्षाविदों और जनप्रतिनिधियों ने बताई उपलब्धियां

हल्द्वानी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार के चार वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में “धामी सरकार के चार वर्ष: उपलब्धियाँ” विषय पर एक विचार-विमर्श कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, शिक्षाविदों, जनप्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने भाग लेकर सरकार की नीतियों और निर्णयों पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) प्रदीप जोशी, अध्यक्ष, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) एवं पूर्व अध्यक्ष, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड ने बीते चार वर्षों में विकास, सुशासन और संवेदनशील प्रशासन का नया अध्याय लिखा है। उन्होंने नकल विरोधी कानून और समान नागरिक संहिता (UCC) को राज्य और देश दोनों के लिए प्रेरणादायक पहल बताया।
उन्होंने कहा, “जब युवा अपनी समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतर रहे थे, तब मुख्यमंत्री धामी स्वयं उनके बीच जाकर संवाद करने वाले पहले नेता बने।”
शिक्षा सुधारों पर बोलते हुए डॉ. जोशी ने कहा कि स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लर्निंग और तकनीक आधारित शिक्षा, सरकार की दूरदर्शी सोच को दर्शाती है।

कालाढुंगी विधायक बंशीधर भगत ने कहा कि धामी सरकार के कार्यकाल में राज्य ने चहुमुखी विकास किया है। उन्होंने मंदिरमाला परियोजना, चारधाम यात्रा मार्ग चौड़ीकरण, धर्मांतरण निवारण कानून, नकल विरोधी कानून और अवैध अतिक्रमण हटाने की मुहिम को राज्य के लिए मील का पत्थर बताया।

हल्द्वानी नगर निगम के मेयर गजराज सिंह बिष्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में लिए गए तीन ऐतिहासिक निर्णय — समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून, और गैरकानूनी मदरसों पर कार्यवाही — उत्तराखण्ड के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेंगे। उन्होंने कहा कि इन निर्णयों ने “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” की भावना को मजबूती दी है।

प्रो. (डॉ.) धनंजय जोशी, पूर्व कुलपति, दिल्ली शिक्षक विश्वविद्यालय ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में युवाओं में नई चेतना और आत्मविश्वास का संचार हुआ है।
प्रो. (डॉ.) सतपाल सिंह बिष्ट, कुलपति, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा, ने कहा कि उत्तराखण्ड अब देश का तीसरा अग्रणी ऑर्गेनिक स्टेट बन चुका है। उन्होंने जैविक खेती, कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग, और नवाचारपूर्ण कृषि तकनीकों को किसानों के लिए भविष्य का भरोसा बताया।

प्रो. (डॉ.) नवीन चन्द्र लोहनी, कुलपति, उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय, ने नई शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन की सराहना करते हुए कहा कि हर जनपद में स्किल डेवलपमेंट सेंटर और उत्तराखण्ड भाषा संस्थान की स्थापना, सरकार की दूरदर्शी पहल है।

प्रो. (डॉ.) दुर्गेश पंत, महानिदेशक, यूकॉस्ट, एवं प्रो. (डॉ.) दीवान सिंह रावत, कुलपति, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि राज्य अनुसंधान, नवाचार और विज्ञान-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ छू रहा है और उत्तराखण्ड अब “टेक्नोलॉजी-ड्रिवन गवर्नेंस” का मॉडल बन रहा है।

प्रो. (डॉ.) एन. एस. बिष्ट, कुलपति, आम्रपाली विश्वविद्यालय, हल्द्वानी, ने कहा कि धामी सरकार की नीति और नियत दोनों स्पष्ट हैं, और राज्य हर क्षेत्र में विकास के नए मानक स्थापित कर रहा है।

प्रो. (डॉ.) गोविंद सिंह बिष्ट, अध्यक्ष, उत्तराखण्ड मीडिया सलाहकार समिति, ने कहा कि सरकार ने धर्मांतरण निवारण कानून, युवा सशक्तिकरण, तीर्थाटन विकास, और फिल्म नीति 2024 जैसे ऐतिहासिक निर्णय लेकर राज्य की छवि को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया है।
उन्होंने कहा कि नई फिल्म नीति से स्थानीय कलाकारों और तकनीशियनों को मंच मिला है, जिससे उत्तराखण्ड “फिल्म डेस्टिनेशन ऑफ इंडिया” के रूप में उभर रहा है।

दिनेश मानसेरा, अध्यक्ष, उत्तराखण्ड जनसंख्या विश्लेषण समिति, ने बताया कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में अब तक 9000 एकड़ भूमि से अवैध कब्जा हटाया गया, जिससे कानून व्यवस्था सुदृढ़ हुई है। उन्होंने “सैन्य धाम निर्माण” और आपदा प्रबंधन में मुख्यमंत्री की सक्रियता, विशेषकर शिलक्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन, को राज्य की प्रशासनिक दक्षता का प्रमाण बताया।

वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि बीते चार वर्षों में चारधाम यात्रा के सुचारू संचालन, ऑल वेदर रोड प्रोजेक्ट, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, महिला सशक्तिकरण, MSME और स्टार्टअप प्रोत्साहन, तथा डिजिटल शासन प्रणाली जैसे क्षेत्रों में धामी सरकार ने उत्तराखण्ड को नई दिशा दी है।


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