हाईकोर्ट शिफ्टिंग विवाद: बार काउंसिल की भूमि बेचने के प्रस्ताव पर हाईकोर्ट की रोक, 4 सप्ताह में जवाब तलब
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड द्वारा हल्द्वानी के गौलापार क्षेत्र में खरीदी गई 2000 वर्गफुट भूमि को बेचने के प्रस्ताव पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह रोक उस याचिका पर सुनवाई के बाद लगाई गई है, जिसमें इस प्रस्ताव को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने बार काउंसिल को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है, वहीं याचिकाकर्ताओं को भी प्रति-शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
हल्द्वानी के गौलापार में हाईकोर्ट को स्थानांतरित करने को लेकर पहले व्यापक चर्चाएँ चल रही थीं। केंद्र सरकार, राज्य सरकार और न्याय विभाग—तीनों ने हाईकोर्ट शिफ्ट करने के प्रस्ताव पर सहमति भी दी थी। इसी के आधार पर बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड ने भी अपने कार्यालय को गौलापार में स्थानांतरित करने के लिए 2000 वर्गफुट भूमि खरीदी, जिसका शिलान्यास मुख्यमंत्री द्वारा किया गया था और भवन निर्माण हेतु ₹1 करोड़ की धनराशि भी स्वीकृत की गई थी।
हाईकोर्ट को हल्द्वानी शिफ्ट करने के आदेश को बाद में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के स्थानांतरण संबंधी आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसके बाद 26 अगस्त 2024 को बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड ने बैठक कर यह कहते हुए भूमि बेचने का प्रस्ताव पारित किया कि अब हाईकोर्ट शिफ्ट होने की संभावना नहीं है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता उज्ज्वल सुनाल और पृथ्वी लमगड़िया ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट स्थानांतरण का मामला अभी विचाराधीन है और अंतिम निर्णय आना बाकी है। उनका कहना है कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार और न्यायपालिका—तीनों ही हाईकोर्ट के स्थानांतरण के पक्ष में हैं। ऐसे में बार काउंसिल किस आधार पर यह दावा कर सकता है कि अब हाईकोर्ट शिफ्ट नहीं होगा? याचिकाकर्ताओं ने बार काउंसिल द्वारा भूमि बेचने के प्रस्ताव को अवैध बताते हुए इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने बार काउंसिल के भूमि बेचने के प्रस्ताव पर तुरंत रोक लगा दी। साथ ही बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया गया है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को भी प्रति-शपथपत्र (काउंटर एफिडेविट) दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अब मामले की अगली सुनवाई बार काउंसिल और याचिकाकर्ताओं के जवाब प्रस्तुत होने के बाद तय होगी।
