उत्तराखंड: शौचालय न होने पर रद्द हुआ ग्राम प्रधान प्रत्याशी का नामांकन, हाईकोर्ट ने लगाई रोक
मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ का बड़ा फैसला, चुनाव आयोग को दिया चुनाव चिन्ह जारी करने का आदेश
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने टिहरी जिले की ग्राम प्रधान पद की प्रत्याशी कुसुम कोठियाल के नामांकन को रद्द करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने साफ कहा है कि केवल शौचालय घर के अंदर न होने के आधार पर किसी प्रत्याशी का नामांकन खारिज नहीं किया जा सकता। साथ ही राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिए गए हैं कि कुसुम कोठियाल को शीघ्र चुनाव चिन्ह आवंटित किया जाए।
यह फैसला मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ ने सुनाया। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता कुसुम कोठियाल की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने पंचायत चुनाव में ग्राम प्रधान पद के लिए वैध तरीके से नामांकन भरा था, लेकिन निर्वाचन आयोग ने यह कहते हुए नामांकन निरस्त कर दिया कि उनके घर में शौचालय नहीं है।
“क्या शौचालय घर के अंदर होना अनिवार्य है?” – कोर्ट में उठा सवाल
कुसुम कोठियाल की ओर से कहा गया कि उनका शौचालय घर से करीब 150 मीटर की दूरी पर स्थित है, जो नियमित रूप से उपयोग में है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह सामान्य व्यवस्था है कि शौचालय घर की सीमा से थोड़ी दूरी पर बनाए जाते हैं। ऐसे में नामांकन निरस्त करना न केवल अनुचित है बल्कि संविधान प्रदत्त चुनावी अधिकारों का हनन भी है।
वहीं, चुनाव आयोग की ओर से कोर्ट में कहा गया कि नामांकन पत्र की जांच के दौरान शपथपत्र में दी गई जानकारी के आधार पर उनका नामांकन सही नहीं पाया गया और समिति ने स्क्रूटनी के बाद नामांकन निरस्त किया है।
हालांकि, कोर्ट ने आयोग की इस दलील को पर्याप्त नहीं माना और यह कहते हुए नामांकन रद्द करने पर रोक लगा दी कि यदि प्रत्याशी के पास शौचालय है, चाहे वह घर के बाहर ही क्यों न हो, तो केवल उस आधार पर नामांकन खारिज करना न्यायसंगत नहीं है।
चुनाव आयोग को सख्त निर्देश
कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि राज्य चुनाव आयोग बिना किसी देरी के कुसुम कोठियाल को चुनाव चिह्न जारी करे ताकि वे चुनाव प्रक्रिया में भाग ले सकें।
